अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) अत्याचार रोकथाम कानून के प्रावधानों को कमजोर करने के विरोध में दलित संगठनों ने सोमवार को पूरे देश में प्रदर्शन किया. इसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं. मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर में छह, राजस्थान के अलवर में एक और उत्तर प्रदेश में दो लोगों की मौत हो गई.

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंसा और मौतों की घटनाओं पर दुख जताया है और सभी दलों व संगठनों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका लगा दी है. वहीं, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘लोगों के प्रदर्शन करने की बात समझ में आती है. लेकिन विपक्षी दल राजनीति क्यों कर रहे हैं? कांग्रेस जैसी पार्टियां, जिन्होंने डॉ बीआर अंबेडकर को भारत रत्न नहीं दिया, अब उनकी अनुयायी होने का दावा कर रही हैं.’ इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत बंद का समर्थन किया था. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के डीएनए में है. जो इस सोच को चुनौती देता है, उसे हिंसा से दबाते हैं.’

20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज होने के साथ आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के लिए आरोपित के सरकारी कर्मचारी होने पर उसके नियोक्ता प्राधिकारी और सामान्य नागरिक होने पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की लिखित मंजूरी को अनिवार्य बना दिया था. हालांकि, इस फैसले के बाद न केवल विपक्षी दलों, बल्कि सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी दलित उत्पीड़न बढ़ने की आशंका जताई थी और सरकार से समीक्षा याचिका लगाने की मांग की थी.