अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) अत्याचार रोकथाम कानून के प्रावधानों में फेरबदल के विरोध में दलित संगठनों ने सोमवार को भारत बंद का आयोजन किया था. सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी खबरें आज सुबह से ही ट्रेंड कर रही हैं. इसको लेकर यहां तमाम राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच खूब छींटाकशी भी हुई है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 20 मार्च को आया था और तब से ही राजनीतिक दलों से लेकर दलित संगठनों तक में इसको लेकर सुगबुगाहट देखी जा रही थी. हालांकि केंद्र ने आज इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका लगाई है और इस खबर पर यहां कई लोगों ने भाजपा और सरकार की आलोचना की है. ट्विटर हैंडल @VenuSpeak पर प्रतिक्रिया है, ‘...भाजपा को आंदोलन शुरू होने तक इंतजार नहीं करना चाहिए था.’ वहीं दूसरी तरफ कई भाजपा समर्थकों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए पार्टी की आलोचना की है.

भारत बंद के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में हिंसा की कई घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों द्वारा कई जगह सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबर है. सोशल मीडिया में इन सभी घटनाओं के हवाले से आंदोलनकारियों की आलोचना की गई है. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, ‘दलितों को विरोध प्रदर्शन करने का कानूनी अधिकार तो है लेकिन बसों को जलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी के पास नहीं है. एससी/एसटी एक्ट पर अदालतों को फैसला करने दिया जाए, लेकिन जब आप कानून अपने हाथ में ले लेते हैं तो अपनी नैतिक ताकत खो देते हैं.’

आज के भारत बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

एमीनेंट इंटेलेक्चुअल | @padhalikha

आंबेडकर के अनुयायी संविधान की ही अवहेलना रहे हैं क्योंकि संवैधानिक शीर्ष अदालत ने एससी/एसटी एक्ट के तहत – जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक निर्दोष – जैसे न्याय के सिद्धांत को बहाल किया है. आंबेडकर इन लोगों पर शर्मिंदा होंगे.

भैयाजी | @bhaiyyajispeaks

क्या ये आंबेडकर की शिक्षाएं हैं? नहीं... क्या ये ‘दबे-कुचले समाज’ का प्रदर्शन है, नहीं... यह कुछ लोगों का राजनीतिक लालच है जो भारत बंद के नाम पर देश की शांति और सौहार्द को बिगाड़ रहे हैं.

हप्पू | @AreeDada__

भारत ‘बंद’ में उपद्रव और उन्माद ‘आज़ाद’ हो जाते हैं.

मोहम्मद आसिफ खान | @imMAK02

मैं भारत बंद का समर्थन करता हूं, लेकिन विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा मुझे स्वीकार्य नहीं है... इन प्रदर्शनकारियों के उन किसानों से सीखने की जरूरत है जिन्होंने नासिक से मुंबई तक का शांतिपूर्ण मार्च किया था.

मंजुल | @MANJULtoons