प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम पर आधारित किताब ‘मन की बात : अ सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो’ के लेखक को लेकर रहस्य पैदा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व सहयोगी राजेश जैन को इस किताब का लेखक बताया जा रहा है. लेकिन, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कुछ अलग ही दावा किया है. एनडीटीवी के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘राजेश जैन का इस किताब से कोई लेना-देना नहीं है. राजेश जैन मेरे दोस्त हैं. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें इस किताब के लोकार्पण कार्यक्रम में जरबन शामिल कर लिया गया था और वहां एक भाषण पढ़ने के लिए दे दिया गया था.’

वहीं, राजेश जैन ने भी अरुण शौरी के इन दावों की पुष्टि की है. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं मन की बात किताब का लेखक नहीं था और मुझे उस पर बतौर लेखक अपना नाम देखकर हैरानी हुई थी.’ राजेश जैन के मुताबिक उन्होंने ‘मन की बात : अ सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो’ के लोकार्पण कार्यक्रम में ही इसका लेखक न होने की बात स्पष्ट कर दी थी. राजेश जैन ने यह भी कहा कि उनके मना करने के बावजूद पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) और नरेंद्र मोदी डॉट इन वेबसाइट पर उन्हें इस किताब के लेखक के रूप में दिखाना जारी रखा है. राजेश जैन ने इस किताब के असली लेखक के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है.

‘मन की बात : अ सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो’ का लोकार्पण बीते साल राष्ट्रपति भवन में किया गया था. इस मौके पर पीआईबी ने तीन प्रेस विज्ञप्तियां जारी की थी, जिनमें राजेश जैन को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं. 25 मई 2017 की विज्ञप्ति में इस किताब को राजेश जैन ‘के द्वारा’ संकलित, जबकि 26 मई की विज्ञप्ति में ‘लेखक’ बताया गया है. वहीं, इसी दिन शाम को जारी विज्ञप्ति में राजेश जैन को इस किताब का ‘संकलनकर्ता’ बताया गया है. उधर, पीआईबी के प्रवक्ता फ्रेंक नोरोन्हा ने किताब का लेखक या संकलनकर्ता न होने के राजेश जैन के दावे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. हालांकि, उन्होंने यह कहा कि पीआईबी की प्रेस विज्ञप्तियों में राजेश जैन को किताब का ‘लेखक’ नहीं, बल्कि ‘संकलनकर्ता’ बताया गया है.