यह किस्सा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (कारोबारियों द्वारा सामाजिक कल्याण के लिए किए जाने वाले काम) की बेहतरीन मिसाल भी कहा जा सकता है. यह 1964 की बात है जब मार्टिन लूथर किंग को शान्ति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था. अटलांटा निवासी और अमरीका के अश्वेत आंदोलन के प्रणेता मार्टिन लूथर तब महज़ 35 वर्ष के थे. तब अपने एक शहरी की इस उपलब्धि से अभिभूत अटलांटा के मेयर इवान एलन मार्टिन लूथर किंग के सम्मान में सामूहिक रात्रिभोज आयोजित करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने शहर के तमाम रसूखदारों को आमंत्रित करने का भी फैसला किया.

लेकिन एटलांटा के इन कुलीन और रसूखदार लोगों ने मेयर के आमंत्रण को कोई तवज्जो नहीं दी. इसका कारण यह था कि शहर में श्वेत बहुसंख्यक आबादी थी और उसे किसी अश्वेत, चाहे वो नोबेल पुरस्कार विजेता ही क्यों न हो, का सम्मान करना अपनी तौहीन लग रहा था.

अमेरिकी समाज में तब रंगभेद का असर इतना गहरा था कि उसे जर्मन वैज्ञानिक आइंस्टीन को या सोवियत लेखक एलेक्ज़ेंडर जोल्ज़ेनित्सिन को नागरिकता देकर उनका सम्मान करना मंजूर था, लेकिन अपने हमवतन मार्टिन लूथर किंग की महानता को स्वीकार करना नहीं. आइंस्टीन और एलेक्ज़ेंडर के प्रति अमेरिकी समाज के स्वीकार्यता भरे रवैए की एक वजह यह होगी ही कि वे उनके काम आने वाले थे, लेकिन यहां यह बात भी कम महत्वपूर्ण नहीं होगी कि वे श्वेतवर्णी भी थे. जाहिर है कि मार्टिन लूथर किंग का अश्वेत होना ही अमेरिकी समाज के एक बड़े तबके लिए उनके प्रति हिकारत का भाव रखने की वजह था.

तो हुआ यह कि अपना कार्यक्रम खटाई में पड़ता देख, मेयर इवान एलन ने कोका-कोला कंपनी के पूर्व प्रेज़िडेंट रॉबर्ट वुडरूफ़ को हालात से रूबरू कराया और उनसे अटलांटा के बड़े उद्योगपतियों को उनका निमंत्रण स्वीकार करने की अपील करने को कहा. कोका कोला कंपनी तब वैश्विक या बहुराष्ट्रीय कंपनी बनने की प्रकिया में थी, और एटलांटा में उसका हेडक्वार्टर था. एटलांटा तब इस बात के लिए भी पहचाना जाता था कि कोका कोला का दफ्तर उस शहर में है. यह इस शहर के लिए बड़े सम्मान की बात थी.

रॉबर्ट वुडरूफ़ ने तब कंपनी के सीईओ जेपॉल ऑस्टिन को मेयर की मदद करने को कहा. ऑस्टिन ने दक्षिण अफ्रीका में 14 साल बिताये थे और रंगभेद के समाज और व्यवसाय पर प्रभाव को काफ़ी नज़दीक से देखा था. उन्होंने एक मीडिया कॉन्फ्रेंस बुलाई और उसमें घोषणा की, ‘अगर यह शहर (एटलांटा) मार्टिन लूथर का सम्मान नहीं कर सकता तो हम कोका-कोला के दफ़्तर को इस शहर से कहीं और ले जाएंगे चाहे हमें कितना भी नुकसान क्यों न हो.’

आखिरकार ऑस्टिन की बात ने असर किया और मेयर इवान एलन का मार्टिन लूथर किंग के सम्मान में दिया गया भोज सफल रहा. लगभग 1600 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया. तब इस सम्मान से अभिभूत हुए मार्टिन लूथर किंग ने अपने भाषण में कहा था, ‘मेरे अपने शहर में मेरा इतना शानदार स्वागत और यह सम्मान मुझे ताउम्र याद रहेगा.’

अपनी अनदेखी के बावजूद किंग का शहरवासियों के प्रति आभार, लोगों के दिल छू गया और तब भोज में सब लोगों ने खड़े होकर अमेरिका का मशहूर लोकगीत ‘वी शैल ओवरकम (हम होंगे कामयाब)’ भी गाया था.

मार्टिन लूथर किंग अपने प्रेरक भाषणों के लिए भी जाने जाते हैं. उनका एक एक ऐसा ही लोकप्रिय भाषण है – वॉट इज़ योर लाइफ्स ब्लू प्रिंट (आपकी जिंदगी का खाका क्या है?) इसमें वे सर्वहारा को विवेकानंद की तरह अपनी ज़िंदगी को अहमियत देने की बात करते हैं या फिर मशहूर लेखक और विचारक विक्टर फ्रैंकल की तरह लोगों को यकीन दिलाते हैं कि उनकी ज़िंदगी महत्वपूर्ण है. इस भाषण के अंत में वे कहते हैं, ‘तुम अगर उड़ नहीं सकते, तो दौड़ो. अगर दौड़ नहीं सकते, तो चलो. अगर चल नहीं सकते, तो रेंग कर जाओ. पर अपने मकसद की तरफ़ बढ़ते रहो.’

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