संसद ठप रहने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार साबित करने की केंद्र सरकार की योजना कारगर साबित नहीं हो रही है. एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल ही उसका साथ देते नजर नहीं आ रहे. खबर के मुताबिक शिव सेना ने संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की उस घोषणा को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि एनडीए के सांसद उन 23 दिनों का वेतन नहीं लेंगे जिनमें संसद का काम नहीं हुआ.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक शिव सेना के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी भाजपा के साथ नहीं है. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (भाजपा) इस बारे में हमसे कोई बातचीत नहीं की. उन्हें एनडीए गठबंधन की याद केवल राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव के समय आती है.’

संसद ठप रहने के लिए भाजपा विपक्ष को जिम्मेदार बता रही है, लेकिन उसकी सहयोगी शिव सेना ने उसी को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सांसद अरविंद सावंत ने कहा, ‘हमें लगता है सरकार नहीं चाहती थी कि संसद चले, और इसका कारण कर्नाटक के चुनाव हैं.’ सावंत ने कहा कि संसद के हंगामे के दौरान स्पीकर सुमित्रा महाजन ने एआईएडीएमके के सांसदों को फटकार नहीं लगाई जो कावेरी नदी के मामले को लेकर सदन में हंगामा कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘संसद भले न चली हो लेकिन सांसदों ने अपना काम किया है.’

शिव सेना के अलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) ने भी ऐसे किसी फैसले की अनदेखी करने के संकेत दिए हैं. गुरुवार को आरएलएसपी के नेता उपेंद्र कुशवाहा से वेतन छोड़ने से संबंधित सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं इस बारे में नहीं जानता.’

इससे पहले भाजपा के ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि जब तक राष्ट्रपति न कहें वे अपना वेतन नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं रोजाना संसद गया, अगर सदन की कार्यवाही नहीं चली तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है.’