आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के मुद्दे पर वाईएसआर कांग्रेस (वाईएसआरसीपी) अपनी प्रतिद्वंदी तेलुगु देशम पार्टी से किसी लिहाज से पीछे नहीं दिखना चाहती. और शायद यही वजह है आज इस मुद्दे पर उसके सभी पांच लोक सभा सांसदों ने अपने इस्तीफे स्पीकर सुमित्रा महाजन को सौंप दिए हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक इन सांसदों ने कहा है कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने में नाकाम रही केंद्र सरकार के विरोध में उन्होंने अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला किया है.

सांसदों के इस्तीफा देते ही वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को चुनौती भी दी है. उन्होंने कहा है कि अब नायडू टीडीपी के सांसदों को उनके पदों से इस्तीफा देने का आदेश दें. रेड्डी ने जानकारी दी है कि इस्तीफा देने वाले सांसद दिल्ली स्थित आंध्र भवन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे. वहीं, पार्टी के नेता और कार्यकर्ता राज्यभर में भूख हड़ताल करेंगे.

उधर, टीडीपी सांसदों ने भले ही इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन इस मामले में वे भी वाईएसआर कांग्रेस की जद्दोजहद के आगे खुद को कमतर नहीं दिखाना चाहते. और शायद इसी वजह से शुक्रवार को टीडीपी सांसद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के चैंबर में जाकर धरने पर बैठ गए. बजट सेशन के आखिरी दिन दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही इस मुद्दे पर जारी हंगामे के चलते स्थगित करनी पड़ी थी. इसके कुछ ही देर बाद टीडीपी सांसद स्पीकर के चैंबर में पहुंच गए थे.

इससे पहले वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों ने स्पीकर सुमित्रा महाजन पर आरोप लगाया था कि वे सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने के लिए बहाने बना रही हैं. द न्यूज मिनट के मुताबिक इस मुद्दे पर पार्टी ने 12 नोटिस दिए थे लेकिन स्पीकर ने बहस की इजाजत नहीं दी. सांसदों ने विरोधी टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की भी आलोचना की है कि वे चार साल एनडीए में रहते हुए आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिला सके. हालांकि इस मुद्दे पर कुछ दिन पहले टीडीपी एनडीए का साथ छोड़ चुकी है.