भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना आठवां नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1आई सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से गुरुवार सुबह चार बजे के आसपास जब पीएसएलवी-सी41 रॉकेट ने उड़ान भरी तो इसरो के वैज्ञानिकों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती थी. यह सफल लॉन्चिंग ऐसे समय में हुई है जब इसरो का अपने संचार सेटेलाइट जीसैट-6ए से संपर्क टूटा हुआ है और वह उससे फिर से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि तय कार्यक्रम के मुताबिक पीएसएली-सी41 की लॉन्चिंग चार स्तरों पर होनी थी. इसरो प्रमुख डॉ के सिवन ने जानकारी दी कि सेटेलाइट को उसकी कक्षा तक पहुंचने में नियत 19 मिनट का समय लगा. इस लॉन्चिंग पर बात करते हुए डॉ के सिवन ने कहा, ‘इस बार हमने एक नई तकनीक (फ्रिक्शन स्टिर वेल्डिंग) अपनाई जिससे भविष्य में काम में सुधार होगा और ज्यादा वजन वाले सेटेलाइट ले जाए जा सकेंगे.’

आईआरएनएसएस-1आई को भारत के पहले नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेने के लिए लॉन्च किया गया है. इस सेटेलाइट का वजन 1,425 किलोग्राम है. इसे दस साल तक नेविगेशन संबंधी सेवाएं देने के लिए बनाया गया है. स्वदेशी तकनीक पर आधारित आईआरएनएसएस-1आई इसरो के सेटेलाइट समूह ‘नाविक’ के साथ मिलकर काम करेगा. यह सेटेलाइट किसी चीज की स्थिति, रफ्तार और समय से संबंधित जानकारी देगा. अंतरिक्ष में भारत के सेटेलाइट समूह नाविक के साथ मिलकर यह यूजर्स को 1,500 किलोमीटर के दायरे की जानकारी देगा. नक्शा तैयार करने, समय का बिलकुल सही पता लगाने, नेविगेशन संबंधी और समुद्री नेविगेशन के अलावा सैन्य क्षेत्र में भी इससे मदद मिलेगी.

इससे पहले पिछले साल 31 अगस्त को इसरो ने सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1एच को लॉन्च किया था. लेकिन वह प्रयास असफल रहा था. गुरुवार की लॉन्चिंग के बाद एक साल पहले की यह असफलता पीछे छूट गई है.