केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश में एक साथ चुनाव कराने की बात करती रही है. अब उसके इस प्रस्ताव को विधि आयोग की तरफ से बल मिल सकता है. खबर है कि विधि आयोग ने इस मुद्दे से जुड़ी अपनी रिपोर्ट के मसौदे में सुझाव दिया है कि 2019 के आम चुनाव में इस प्रस्ताव पर आंशिक रूप से अमल किया जा सकता है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले पैनल में शामिल एक उच्चाधिकारी ने यह बात कही है.

इस मामले में आयोग जो ड्राफ्ट तैयार कर रहा है उसमें सुझाव दिया गया है कि जिन राज्यों में 2021 में चुनाव होने हैं उनमें इन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ कराया जा सकता है. बाकी चुनाव 2024 के आम चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं. इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान के नेतृत्व में इसी 17 अप्रैल को बैठक होनी है. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान का कहना है कि आयोग इस मामले से जुड़े राजनीतिक मुद्दों से दूर रहेगा. उन्होंने कहा, ‘हम इसे केवल कानूनी तौर पर देख रहे हैं.’

आयोग के भीतर अभी तक हुई चर्चा में यह बात निकल कर आई है कि एक साथ चुनाव कराने के लिए राजनीतिक सहमति जरूरी है. एक अधिकारी ने बताया, ‘राजनीतिक सहमति सबसे बड़ा मुद्दा है. संविधान और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम दोनों में संशोधन करने होंगे. मौजूदा विधानसभाओं को छोटा किया जा सकता है, लेकिन किसी विधानसभा का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है. संसद को इस पर कानून बनाना होगा. इसके अलावा और भी दिक्कतें हैं. जैसे इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए ईवीएम मशीनों और वीवीपैट की व्यवस्था करना.’

लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने के अलावा 17 अप्रैल की बैठक में दो और अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी. इनमें अदालत की अवमानना के कानून पर पुनर्विचार और बीसीसीआई को आरटीआई कानून के दायरे में लाना शामिल हैं.