कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर 16 अप्रैल तक के लिए रोक लगा दी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक जस्टिस सुब्रत तालुकदार ने भाजपा की बंगाल इकाई की एक याचिका पर यह आदेश दिया है. याचिका में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर आरोप लगाया गया था कि वह चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के लिए हिंसा और जोर-जबरदस्ती कर रही है. इसे देखते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि 16 अप्रैल तक नामांकन वापस लेने और जांच की प्रक्रिया पर रोक लगी रहेगी.

इसके अलावा कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से इस मामले में 16 अप्रैल तक रिपोर्ट देने को कहा है. रिपोर्ट में आयोग को बताना होगा कि चुनाव के दौरान विपक्ष की ओर से की गईं शिकायतों पर उसने क्या कार्रवाई की. आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट चुनाव को लेकर कोई फैसला लेगा. हाई कोर्ट के इस आदेश को अभूतपूर्व माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल में 1978 से शुरू हुए ग्रामीण चुनावों में यह पहली बार है जब चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है.

उधर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘हम अदालतों को सलाम करते हैं. कम से कम वे हमारी व्यथा सुन रही हैं. सरकार, पुलिस और राज्य चुनाव आयोग तक ने हमारी अपीलों पर ध्यान नहीं दिया.’ वहीं, टीएमसी सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी. बनर्जी ने कहा, ‘ऐसे कई आदेश पहले दिए गए हैं कि चुनाव प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद रोकी नहीं जा सकती.’

पश्चिम बंगाल में एक, तीन और पांच मई को पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग होनी है. मतगणना आठ मई को होगी. इन चुनावों को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले टीएमसी, भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम के शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है.