देश में उन्नाव रेप केस के अलावा जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक आठ साल की बच्ची से गैंगरेप और उसकी बेरहमी से हत्या का मामला भी सुर्खियों में बना हुआ है. कठुआ के इस मामले में पुलिस की चार्जशीट के हवाले से जो रिपोर्टें आ रही हैं उनमें बच्ची से बरती गई क्रूरता का पता चलता है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक चार्जशीट में बताया गया है कि बच्ची को एक मंदिर में कैद करके रखा गया था. इस दौरान उसे शांत रखने के लिए कई बार नशीली दवाएं दी गईं और फिर उसका बार-बार रेप किया गया.

आसिफा नाम की यह बच्ची बकरवाल समुदाय से थी. यह एक खानाबदोश मुस्लिम समुदाय है. इस साल 10 जनवरी को जम्मू के कठुआ जिले से आसिफा का अपहरण किया गया था. उस समय वो घर के नजदीक घोड़ों को चरा रही थी. जम्मू-कश्मीर पुलिस और क्राइम ब्रांच की तरफ से दायर चार्जशीट के मुताबिक राजस्व विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी संजी राम ने इस अपराध की योजना बनाई थी. रिपोर्ट के मुताबिक बकरवाल समुदाय को डराने के लिए संजी राम ने यह योजना बनाई थी ताकि वे रासाना गांव छोड़कर चले जाएं. इस काम में उसने अपने भतीजे, जो स्कूल ड्रॉप आउट है, को भी शामिल किया था.

इस मामले में अभी तक आठ लोगों को आरोपित बनाया गया है. इनमें संजी राम, उसका भतीजा, बेटा विशाल जंगोत्रा, भतीजे का एक दोस्त, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और दो विशेष पुलिस अधिकारी शामिल हैं. आरोपित भतीजे को पहले नाबालिग बताया गया था, हालांकि डीएनए टेस्ट में उसकी उम्र 19 साल पता चली है. चार्जशीट में उस पर आरोप है कि उसी ने संजी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा को फोन करके पूछा था कि अगर वह अपनी हवस पूरी करना चाहता है तो कठुआ आ जाए. विशाल उस समय मेरठ में था. वहीं, पुलिस वालों पर आरोप है कि उन्होंने इस अपराध के सबूत मिटाने की कोशिश की और पूरे मामले को दबाने के बदले आरोपितों से रिश्वत ली.

चार्जशीट के मुताबिक जिस मंदिर में बच्ची को छुपाया गया उसका नाम देवस्थान है. संजी राम इस मंदिर का संचालक है. मंदिर में लाने के बाद बच्ची को लगातार नशीली दवाएं दी गईं और गैंगरेप किया गया. चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपित भतीजे द्वारा गला दबाकर बच्ची को मारने से पहले उसे 14 जनवरी को मंदिर में रखा गया था. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि एक और आरोपित ने कहा था कि वह भी बच्ची से रेप करना चाहता है. 17 जनवरी को आसिफा का शव देवस्थान से काफी दूर जंगल में मिला था.

चार्जशीट में एक बात साफ तौर पर कही गई है कि जांच में आगे जो भी नतीजा निकले, यह तय है कि यह अपराध इन्हीं आठ लोगों ने किया है. इसमें यह भी बताया गया है कि फॉरेन्सिक विशेषज्ञों और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के साथ मिलकर जांचकर्ताओं ने घटनास्थल का दौरा किया था. उन्होंने देवस्थान समेत घटना से जुड़ी जगहों का निरीक्षण किया था. इस दौरान उन्हें लकड़ी के डंडों पर खून के निशान और बाल मिले थे. कुछ बाल देवस्थान और उस जंगल से बरामद हुए जहां बच्ची का शव फेंक दिया गया था. बाद में उन्हें डीएनए टेस्ट के लिए नई दिल्ली भेज दिया गया. उनमें से एक नमूना आसिफा के डीएनए से मेल खाता है.