एससी/एसटी कानून में हुए बदलावों पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया है. यह जवाब गुरुवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दाखिल किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि एससी/एसटी कानून में किए गए बदलावों से यह कानून कमजोर हुआ है और इससे देश में अशांति, आक्रोश, असहजता और कटुता का भाव भी बढ़ा है.

शीर्ष अदालत के सामने उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून पर किए फैसले की समीक्षा होनी चाहिए. वेणुगोपाल का यह भी कहना था कि कानून बनाने का काम विधायिका का है इसलिए सुप्रीम का कानून बदलने का फैसला भी विधायिका के काम में दखल देने जैसा है. उन्होंने आगे कहा कि कानून में बदलाव के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा हुई है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने पहले के आदेश को वापस ले सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते महीने एससी/एसटी एक्ट में कुछ बदलाव किए थे. इन बदलावों के जरिये किसी सरकारी अधिकारी की इस कानून के तहत सीधी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले मामले की जांच होनी चाहिए फिर आरोपित को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. इसके अलावा शीर्ष अदालत ने कुछ मामलों में जमानत की छूट भी दी थी.

काूनन में हुए इन बदलावों का अनेक दलित संगठनों ने विरोध किया था. उनका कहना था कि इससे यह कानून कमजोर हुआ है. बदलावों के विरोध में उन्होंने दो अप्रैल को भारत बंद बुलाया था. उस दौरान देश में हिंसक घटनाएं हुई थीं. तब सुरक्षा—व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर बल प्रयोग किया था. इसके अलावा कई जगहों पर धारा 144 और कर्फ्यू भी लगाना पड़ा था.

भारत बंद के दौरान हिंसक घटनाओं में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी. इसमें कई लोग घायल भी हुए थे. बंद की वजह से पंजाब में दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा भी एक दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी थी. एक अनुमान के मुताबिक इस बंद से देश को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था.

हालांकि बीते हफ्ते पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कानून में हुए बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाने से इनकार कर दिया था. तब भी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने यही कहा था कि इस कानून की आड़ में किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए.