कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रस्ताव को कांग्रेस ने ठुकरा दिया है. यही नहीं उनके जैसे अन्य सभी नेताओं को भी पार्टी ने टका सा ज़वाब दे दिया है जो दो सीटों से लड़ने की तैयारी कर रहे थे. पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में इसकी पुष्टि की है.

सूत्रों के मुताबिक 12 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दो सीटों- चामुंडेश्वरी (मैसुरु जिला) और बादामी (बागलकोट जिला) से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें दो में से किसी एक सीट को चुनना होगा. सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है. लिहाज़ा सिद्धारमैया से कहा गया है कि वे इससे पहले ही अपने विकल्प के बारे में पार्टी नेतृत्व को बता दें.

यही नहीं पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह मशविरा भी दिया है कि चूंकि उन्हें एक ही सीट से लड़ने की इजाज़त है इसलिए वे अपने लिए कोई सुरक्षित ढूंढ लें क्योंकि चामुंडेश्वरी में वे मुश्किल में फंस सकते हैं. यहां वोक्कालिगा और लिंगायत मतदाताओं की तादाद काफ़ी ज़्यादा है. इसलिए यहां चुनावी संघर्ष तगड़ा और नज़दीकी हो सकता है. जबकि बादामी सीट पर कुरुबा समुदाय के मतदाताओं की संख्या ज़्यादा है. चूंकि मुख्यमंत्री ख़ुद इसी समुदाय से आते हैं इसलिए यह सीट उनके लिए सुरक्षित रहेगी. हालांकि सीट का चुनाव उन्हें ख़ुद करना है.

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री ही नहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वरा और कुछ अन्य नेता भी दो सीटों से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन पार्टी ने उन सभी के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं ताकि अन्य नेताओं को भी चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सके. बताया जाता है कि पार्टी के इस रुख़ के बाद परमेश्वरा सहित अधिकांश नेता एक सीट से चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं. परमेश्वरा कोरतागेरे सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं जहां से वे 2013 में हार गए थे. वे संभवत: बेंगलुरू की पुलकेशीनगर सीट से चुनाव में उतरने का विचार छोड़ रहे हैं.