पंजाब के स्थायी निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पर गैर-इरादतन हत्या के मामले में पंजाब सरकार दुविधा में फंसती दिख रही है. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा है कि ‘रोड रेज’ के इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को दोषी ठहराने का पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला सही था और उन्हें तीन साल की जेल होनी चाहिए.

इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ को पंजाब सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि पटियाला के रहने वाले गुरनाम सिंह की मौत सिद्धू के मुक्का मारने से हुई थी. वकील के मुताबिक निचली अदालत का यह निष्कर्ष गलत था कि गुरनाम सिंह की मौत ब्रेन हैमरेज से नहीं बल्कि हृदय गति रुकने से हुई थी.

सरकारी वकील की इस दलील से पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. उसकी परेशानी की वजह यह है कि 2006 में पंजाब सरकार ही सिद्धू को दोषी ठहराने के लिए कोर्ट गई थी. अगर अब वह सिद्धू को बचाने का प्रयास करती तो विरोधियों को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल जाता. वहीं, इस रुख के चलते सरकार के रूप में उसकी किरकिरी हो रही है. वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू की बात करें तो सजा को बरकरार रखे जाने की सूरत में वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगे.

क्या है मामला?

करीब 30 साल पहले 27 दिसंबर, 1988 को यह घटना घटी थी. पटियाला में कार पार्किंग को लेकर नवजोत सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति से कहासुनी हो गई थी. देखते ही देखते बात हाथापाई में बदल गई. सिद्धू के मुक्का मारने से गुरनाम सड़क पर गिर गए थे. उस समय गुरनाम के साथ उनका भांजा भी था. उसका कहना था कि सिद्धू ने गुरनाम को मुक्का मारा था. घटना के बाद गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया था लेकिन वे पहले ही दम तोड़ चुके थे.