पूर्व रूसी जासूस सेर्गेई स्क्रीपाल और उनकी बेटी को चार मार्च के दिन, जिस रासायनिक विष का शिकार बनाया गया वह वही है, जैसा ब्रिटेन कहता रहा है. यह बात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के रासायनिक अस्त्र प्रतिबंधक संगठन ‘ओपीसीडब्ल्यू’ के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ब्रिटेन में दो सप्ताहों की जांच-पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट में कही है. इससे पहले ब्रिटेन ने कहा था कि यह 1970 और 1980 वाले दशकों में तत्कालीन सोवियत संघ में विकसित ‘नोविचोक’ (नव-आगंतुक) नाम का एक बहुत ही प्राणघातक स्नायविक विष (नर्व एजेंट) है. यह विष तरल या चूर्ण रूप में होता है और हवा के संपर्क में आने पर त्वचा तथा सांस के रास्ते से शरीर में पहुंचता है.

‘ओपीसीडब्ल्यू’ ने अपनी जांच की विस्तृत रिपोर्ट गोपनीय रखी है. वह केवल ‘ओपीसीडब्ल्यू’ के सदस्य देशों की सरकारों को मिलेगी. मीडिया के लिए गुरुवार 12 अप्रैल को प्रकाशित संक्षिप्त रिपोर्ट में ‘ज़हरीले रसायन’ (टॉक्सिक केमिकल) शब्द का प्रयोग करते हुए न तो रासायनिक विष वाले पदार्थ का नाम लिया गया है और न ही यह कहा गया है कि उसका स्रोत क्या है. यानी, यह नहीं बताया गया है कि वह किस देश में बना हो सकता है.

स्रोत बताने का अधिकार नहीं

स्रोत बताने का ‘ओपीसीडब्ल्यू’ को कोई अधिकार भी नहीं है. वह विष की केवल रासायनिक विशेषताएं ही बता सकता था. इसलिए उसकी रिपोर्ट में इतना ही कहा गया है कि इस्तेमाल किया गया ज़हरीला पदार्थ ‘अशुद्धता से लगभग पूरी तरह मुक्त’ उच्चकोटि की शुद्धता वाला है. इस्तेमाल किए गए पदार्थ के नमूनों की अलग-अलग मान्यता प्राप्त चार प्रयोगशालाओं में जांच-परख करवाने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है.

जानकारों के अनुसार, उच्चकोटि की शुद्धता जहां यह संकेत देती है कि प्रयुक्त रासायनिक पदार्थ किसी उच्चकोटि की सरकारी प्रयोगशाला में बना हो सकता है, वहीं अशुद्धियों के न होने से यह जान पाना बहुत ही मुश्किल है कि वह किस जगह या देश की प्रयोगशाला में बना होगा. रासायनिक दवाओं या पदार्थों के उत्पादन में जो आरंभिक कच्चा माल लगता है उसमें अक्सर कुछ ऐसे तत्व बहुत ही अल्प मात्रा में घुले-मिले हो सकते हैं, जिनकी पहचान से यह सुराग मिल सकता है कि वह चीज़ कहां बनी हो सकती है. ब्रिटेन में प्रयुक्त ‘ज़हरीले रसायान’ में स्रोत का सुराग देने वाली ऐसी कोई विशिष्ट अशुद्धियां शायद नहीं मिलीं, क्योंकि पोर्टन डाउन की ब्रिटिश प्रयोगशाला भी यह नहीं जान पायी कि उसका स्रोत क्या है.

ब्रिटेन अपने दावे की पुष्टि मान रहा है

ब्रिटेन ‘ओपीसीडब्ल्यू’ की रिपोर्ट को तब भी अपने लिए बहुत बड़ी राहत मान रहा है. वह इसे अपने इस दावे की पुष्टि मान रहा है कि भूतपूर्व सोवियत संघ के समय सैन्य उपयोग के लिए खोजा गया ‘नोविचोक’ उसके आज के उत्तराधिकारी रूस में ही बनता है, इसलिए सेर्गेई स्क्रीपाल और उनकी बेटी यूलिया स्क्रीपाल को उससे मारने का प्रयास केवल रूस की सरकार द्वारा ही प्रायोजित हो सकता है.

इसी बात पर बल देते हुए ब्रिटिश विदेशमंत्री बोरिस जॉन्सन ने कहा, ‘हम अब अपने साथियों के साथ मिलकर इस तरह के बेतुके हथियारों को मिटाने के लिए सारी शक्ति लगा देंगे. हमने अगले क़दम पर विचार करने के लिए ‘ओपीसीडब्ल्यू’ कार्यकारिणी परिषद की आगामी बुधवार को एक बैठक भी बुलाई है. क्रेमलिन (रूसी नेताओं को) अब जवाब देना ही पड़ेगा.’

रूस ने अपने हाथ झाड़े

रूस बार-बार यही कहता रहा है कि उसके पास जो भी रासायनिक हथियार बाकी बचे थे, उन्हें सितंबर 2017 में ‘ओपीसीडब्ल्यू’ के निरीक्षकों की उपस्थिति नष्ट कर दिया गया है. यह भी कि सेर्गेई स्क्रीपाल और उनकी बेटी यूलिया पर हुए रासायनिक विष के हमले से उसका कोई संबंध नहीं है.

रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने रूस के उप-विदेशमंत्री सेर्गेई रयाब्कोव के हवाले से कहा कि रूस ‘ओपीसीडब्ल्यू’ की रिपोर्ट का पहले ठीक से अध्ययन करना चाहता है. रयाब्कोव के मुताबिक अध्ययन से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता. रूस के उप-उद्योगमंत्री गेओर्गी कालामानोव का कहना था कि रूस के पास वही रासायनिक युद्ध सामग्रियां थीं जो 2017 में ‘ओपीसीडब्ल्यू’ की निगरानी में नष्ट की जा चुकी हैं. अब वैसी कोई चीज़ उसके पास नहीं है.

रूस की शिकायत

रूस को शिकायत है कि स्क्रीपाल पिता-पुत्री को मारने के लिए इस्तेमाल हुए विष की जांच में वह भी सहयोग देना चाहता था, पर ब्रिटेन ने उसका अनुरोध ठुकरा दिया. ब्रिटेन और फ्रांस तथा अमेरिका जैसे उसके मित्र देशों ने, बिना किसी प्रमाण के, पहले ही दिन से रूस को दोषी घोषित कर दिया. कुछ प्रेक्षक भी समझ नहीं पा रहे हैं कि दोहरा जासूसी एजेंट होते हुए भी जब रूस ने सेर्गेई स्क्रीपाल को माफ़ कर दिया और 2010 में जासूसों की एक अदला-बदली के अंतर्गत ब्रिटेन जा कर बसने दिया, तो फिर आठ साल बाद उन्हें मार डालने से उसे बदनामी के सिवाय और क्या मिल सकता है?

जहां तक रासायनिक हथियार वाले विष ‘नोविचोक’ का प्रश्न है, तो उसके भी सौ से अधिक प्रकार हैं और उसका रासायनिक सूत्र (फ़ॉर्मूला) अब इतना अज्ञात भी नहीं है कि यह कहा जा सके कि वह केवल रूस की बपौती है या केवल वही उसे बनाता होगा. कहा तो यहां तक जाता है कि जिस किसी के पास अच्छी प्रयोगशालाएं या रासायनिक खादें बनाने वाले अच्छे कारख़ाने होंगे, वह ‘नोविचोक’ की भी कोई न कोई क़िस्म बना सकता है.

यूलिया को अस्पताल से छुट्टी और उनका अजीब बयान

स्क्रीपाल पिता-पुत्री को चार मार्च के दिन बेहोशी की अवस्था में जब उनके निवास स्थान यानी ब्रिटेन के साल्सबरी के अस्पताल में भर्ती किया गया, तब उनकी हालत इतनी ख़राब थी कि उनके जीवित बचने की संभावना लगभग शून्य के बराबर आंकी जा रही थी. लेकिन यूलिया स्क्रीपाल को रविवार आठ अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी मिल गयी. उनके पिता की हालत भी इतनी बेहतर हो गयी है कि संभावना यही है कि वे भी बच जायेंगे.

दूसरी ओर, विचित्र बात यह है कि 33 वर्षीय यूलिया स्क्रीपाल को अस्पाताल से छुट्टी मिलते ही किसी अज्ञात जगह पर छिपा दिया गया है. बताया जा रहा है कि पुलिस उनकी रखवाली कर रही है. बुधवार 11 अप्रैल को स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने यूलिया स्क्रीपाल के नाम पर एक ऐसा वक्तव्य जारी किया, जिसके बारे में संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि वह या तो पुलिस ने स्वयं लिखा है या यूलिया पर दबाव डाल कर लिखवाया है. वक्तव्य इस प्रकार हैः

‘मुझे विशेष रूप से प्रशिक्षित ऐसे (पुलिस) अफ़सर मिले हैं, जो मेरी देखभाल कर रहे हैं और उन जांच-प्रक्रियाओं को समझाते हैं, जो अब चल रही हैं. मैं अपने मित्रों और परिजनों से संपर्क कर सकती हूं और मुझे रूसी दूतावास में उन ख़ास लोगों के बारे में बताया गया है, जिन्होने मुझे अपनी हर संभव सहायता देने की पेशक़श की है. फिलहाल मैं उनकी सेवाओं का उपयोग नहीं करना चाहती, लेकिन यदि मेरा विचार बदला, तो मैं जानती हूं कि मैं उन से संपर्क कैसे कर सकती हूं.’

‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं सुरक्षित हूं और समय बीतने के साथ और भी बेहतर महसूस करती हूं. लेकिन, मैं इतनी शक्तिशाली भी नहीं हूं कि मीडिया को ऐसा कोई इंटरव्यू दे सकूं. जो मैं एक दिन दे सकने की आशा रखती हूं. उस समय तक के लिए मैं जोर देकर कहना चाहती हूं कि मेरे या मेरे पिता के सिवाय हमारी ओर से कोई कुछ नहीं कहेगा. मैं अपनी चचेरी बहन विक्टोरिया को हमारे प्रति उसकी चिंताओं के लिए धन्यवाद देती हूं, पर यह भी कहना चाहती हूं कि वह फिलहाल मुझ से मिलने या संपर्क करने का प्रयास न करे. उसके विचार और कथन न तो मेरे हैं और न मेरे पिता के. मैं अभी प्रेस या मीडिया से बात नहीं करना चाहती और उनसे कहना चाहती हूं कि जब तक मैं अपनी वर्तमान स्थिति से निपटने में लगी हूं, वे समझ और धीरज से काम लें.’

रूसी दूतावास का संदेह

ब्रिटेन में रूसी दूतावास को संदेह है कि इस वक्तव्य की भाषा यूलिया की भाषा नहीं है. दूतावास के अधिकारी इस वक्तव्य की भाषा को किसी रूसी नागरिक की स्वाभाविक भाषा नहीं, ब्रिटिश दफ्तरशाहों की भाषा मानते हैं. उनका कहना है कि इस वक्तव्य में लिखा गया है कि ‘मैं अपने मित्रों और परिजनों से संपर्क कर सकती हूं’, पर यूलिया ने रूस में अपने परिवार के किसी भी सदस्य से अभी तक संपर्क नहीं किया है. यह वक्तव्य किसी कैमरे के सामने नहीं दिया गया है बल्कि यह स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस की वेबसाइट पर है.

उज़्बेकिस्तान में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके क्रेग मरे का मानना है कि यूलिया स्क्रीपाल अस्पताल से छुट्टी पाते ही अब पुलिस की मुट्ठी में है. वे कहते हैं, ‘यह संभव नहीं लगता कि वही यूलिया, जो टेलीफ़ोन करने लायक ठीक होते ही अस्पताल से सबसे पहले अपनी चचेरी बहन को फ़ोन करती है, अब स्कॉटलैंड यार्ड के एक औपचारिक वक्तव्य के माध्यम से यह कहे कि उसकी बहन उसे देखने या फोन करने की न सोचे.’ कुल मिलाकर इस मामले में अब भी कई झोल हैं.