पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पर वहां के सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है. शीर्ष अदालत की पांच जजों वाली बेंच ने शुक्रवार को यह फ़ैसला किया है. ख़बरों के मुताबिक अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 62 (1) (एफ़) के तहत नवाज़ शरीफ़ पर यह प्रतिबंध लगाया है. अदालत ने यह ऐतिहासिक आदेश ज़ारी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह का प्रतिबंध पूरी तरह जायज़ है. इसके बाद अब शरीफ़ जीवन भर न तो चुनाव लड़ सकेंगे (बशर्ते संविधान न बदल दिया जाए) और न कोई सार्वजनिक पद संभाल पाएंगे. अदालत ने इसी साल 14 फरवरी को इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

अदालत ने क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के महासचिव जहांगीर तरीन पर भी इसी तरह का प्रतिबंध लगाया है. दोनों के ख़िलाफ़ यह आदेश फ़र्ज़ी डिग्रियां हासिल करने के आरोपों को सही मानने के बाद ज़ारी किया गया है. अदालत में दोनों नेताओं के ख़िलाफ़ इस मामले में 17 याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें दोनों को संविधान के अनुच्छेद 62 (1) (एफ़) के तहत प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी. इस अनुच्छेद में प्रावधान है कि संसद सदस्य बनने वाले नेता को ‘सादिक़ और अमीन’ यानी ‘ईमानदार और नेक’ होना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि इसी अनुच्छेद के आधार पर इससे पहले पनामा पेपर्स मामले में भी शरीफ़ काे प्रतिबंधित किया गया था. इसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और संसद की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा देना पड़ा था. पनामा पेपर्स मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया समूहों के एक संगठन ने उजागर किया था. इसमें दुनिया भर के उन तमाम लोगों के नाम सामने लाए गए थे जिन्होंने पनामा जैसे छोटे से देश की कानूनी फ़र्म- मोज़ैक फोन्सेका की मदद से फ़र्ज़ी कंपनियां बनाकर अपने काले धन को विदेश में ठिकाने लगाया. इनमें शरीफ़ परिवार के लोगों का भी नाम था.