जम्मू के कठुआ जिले में आठ साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और बाद में बेरहमी से हत्या करने के मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. मीडिया रिपोर्टों में इस मामले से जुड़े नए तथ्य लगातार सामने आ रहे हैं. इस बीच जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने इस घटना को लेकर कहा है कि इससे बदतर कुछ और नहीं हो सकता. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की बात कही है.

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक डीजीपी एसपी वैद ने कहा है, ‘यह बहुत जघन्य अपराध है. इससे बदतर कुछ नहीं हो सकता. विशेष जांच दल (एसआईटी) ने काफी पेशेवर तरीके से काम किया है और चार्जशीट दायर की है. हमें उम्मीद है कि मामले में पूरा न्याय होगा.’ उधर, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को घोषणा की कि उनकी सरकार नाबालिगों से बलात्कार करने के दोषियों के लिए मौत की सजा देना अनिवार्य करने के लिए एक नया कानून लाएगी. उन्होंने मांग की कि कठुआ गैंगरेप-हत्या मामले के दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो एक उदाहरण हो.

इस बीच खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में स्वतः संज्ञान लेगा और इस भयानक अपराध की जांच-पड़ताल करेगा. वकीलों के एक समूह ने अदालत से गुहार लगाई थी कि वह इस मामले में स्वतः संज्ञान ले. इसके बाद कोर्ट ने यह बात कही. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे यह लिखित में चाहिए कि जम्मू में वकीलों ने पुलिस को चार्जशीट फाइल करने से रोकने की कोशिश की थी. कोर्ट ने वकीलों द्वारा पीड़ित परिवार का केस लड़ने वाले लोगों को धमकाए जाने की बात भी लिखित में देने को कहा है. इस पर वकीलों के समूह ने कहा कि वे ये सभी तथ्य सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच को लिखित में देंगे.