अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया पर हमला बोल दिया है. यह हमला राजधानी दमिश्क में सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद के उन ठिकानों पर किया गया है जहां कथित तौर पर रासायनिक हथियार तैयार किए जा रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक शुक्रवार को दमिश्क में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों के ठिकानों पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वह उनका इस्तेमाल बंद नहीं करता.

बीती सात अप्रैल को सीरिया के नागरिकों पर रासायनिक हमला किया गया था. इस हमले में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी. अमेरिका ने इसके लिए बशर-अल-असद और उनके सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त तेवर अपना लिए थे. रासायनिक हमलों का जवाब देने की बात तभी से कही जा रही थी.

शुक्रवार को हुए हमलों को लेकर वाइट हाउस से जारी किए गए बयान में ट्रंप ने कहा, ‘कुछ समय पहले मैंने अमेरिकी सैन्य बलों को आदेश दिया था कि वे तानाशाह बशर-अल-असद के रासायनिक हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाएं.’ ट्रंप ने आगे कहा, ‘ऐसे काम (रासायनिक हमले) इंसान नहीं राक्षस करते हैं. ‘ ताजा हमले को लेकर एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि टॉमहॉक मिसाइलों से रासायनिक हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया है.

ताजा हमलों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, ‘आज रात जो हमले किए गए उनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रासायनिक हथियारों के निर्माण और इस्तेमाल से बचा जाए.’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने असद सरकार को समर्थन देने वाले रूस और ईरान की भी आलोचना की.

उधर, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि उन्होंने सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियारों की क्षमता को खत्म करने के लिए ब्रिटिश सेना को हमले का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद सीरिया के गृह युद्ध में शामिल होना या सरकार बदलना नहीं है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों ने भी यही बात कही.