इस साल जनवरी से ही ये अटकलें थीं कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया को सियासी मुठभेड़ में ढेर किया जा सकता है. यानी उन्हें इस पद से हटाया जा सकता है. और 14 अप्रैल को यह अटकलें सही साबित हुईं जब विहिप के इतिहास में पहली बार हुए चुनाव में तोगड़िया के खास जी राघव रेड्‌डी अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए. उनकी जगह हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे को चुन लिया गया.

ख़बरों के मुताबिक शनिवार को गुरुग्राम (गुड़गांव) में विहिप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संगठन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ. विहिप के 54 साल के इतिहास (संगठन 1964 में बना) में पहली बार सीधे चुनाव की स्थिति बनी थी. इसमें निवर्तमान अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष जी राघव रेड्‌डी के सामने आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) समर्थित कोकजे मैदान में थे. चुनाव में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व जज कोकजे को 192 में 131 वोट मिले. जबकि रेड्‌डी को सिर्फ़ 60 सदस्यों का समर्थन ही मिल सका. इसके साथ ही विहिप में रेड्‌डी-तोगड़िया के प्रभाव का भी अंत हो गया.

यहां बताते चलें कि विहिप की अब तक की स्थापित परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सर्वसम्मति से अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करते हैं. इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष ही अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सहित अपनी टीम के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करते हैं. फिर संगठन का काम मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और उनके सहयोगी ही देखते हैं. साल 2011 में विहिप के तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रेड्‌डी ने ही तोगड़िया को अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया था. तब से वे लगातार इस पद पर बने हुए थे.

इस चुनाव में अपनी पराजय के बाद तोगड़िया ने मीडिया से बातचीत में ऐलान किया कि अब वे विहिप में नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘देश के 100 करोड़ हिंदुओं की आवाज दबाई गई है. सत्‍ता के मदमस्‍तों (केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना) ने सत्‍य और धर्म को दबाया है.’ उन्होंने हिंदू, किसान, युवा, महिला और मजदूरों की मांगों को लेकर 17 अप्रैल से अहमदाबाद में अनिश्‍चितकालीन धरने पर बैठने की भी घोषणा की.

वैसे पटकथा मार्च में ही लिख दी गई थी

ताेगड़िया को विहिप से बाहर का रास्ता भले अभी दिखाया गया हो लेकिन बताया जाता है कि इसकी पटकथा मार्च में लिख दी गई थी. तब नागपुर में आरएसएस प्रमुख के बाद संगठन के दूसरे सबसे बड़े पदाधिकारी- सरकार्यवाह (महामंत्री) के पद पर सुरेश ‘भैया जी’ जोशी लगातार चौथी बार चुने गए थे. बताया जाता है कि उस समय आरएसएस में मौज़ूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समर्थक लॉबी ने जोशी के नाम को इसी शर्त पर समर्थन दिया था कि तोगड़िया को विहिप से हटाया जाए. आरएसएस ने इस पर न सिर्फ़ सहमति दी बल्कि जोशी के चुनाव के अगले ही दिन यानी 12 मार्च काे विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रेड्‌डी को एक पत्र भेजा. इसमें बताया कि इस बार ‘विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराए जाएंगे. इस पर 13 मार्च तक अपना सझाव भेजें. रेड्‌डी ने समय-सीमा के भीतर अपने सुझाव भेज भी दिए. इसके बाद 15 मार्च को ही उन्हें सूचित कर दिया गया कि विहिप 14-15 अप्रैल को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने का फैसला कर लिया गया है. हालांकि तब से ही रेड्‌डी आरएसएस पर आरोप भी लगा रहे थे कि वह विहिप के इन चुनावों को ग़लत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.