भारत और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता जगज़ाहिर है. अक्सर इस प्रतिद्वंद्विता में चीन ही भारत पर भारी पड़ता है. और अब ख़बर है कि नौसैनिक विमानवाहक जहाजों के मामले में भी भारत पर चीन भारी पड़ने वाला है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक चीन जल्द ही अपने दूसरे नौसैनिक विमानवाहक जहाज का शुरूआती परीक्षण शुरू कर रहा है. यह प्रक्रिया महीने भर में ही शुरू हो सकती है. चीन की योजना परमाणुक्षमता से संपन्न भारी-भरकम विमानवाहक जहाज बनाने की भी है. इससे समुद्र में नई होड़ शुरू होने की भी आशंका है. साथ ही पांच दशक से ज़्यादा से विमानवाहक जहाज का संचालन कर रहे भारत के चीन से पिछड़ने की भी आशंका है.

इसका कारण रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं. उनके मुताबिक भारत के पास इस वक़्त एक विमानवाहक जहाज है. यह रूस से मिला एडमिरल गोर्शकोव नवंबर 2013 में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था. तब से इस 44,000 टन वजनी इस जहाज को नौसैना आईएनएस विक्रमादित्य के नाम से संचालित कर रही है. इसके अलावा आईएनएस विक्रांत के नाम से एक अन्य स्वदेशी विमानवाहक जहाज कोचीन शिपयार्ड में बनाया जा रहा है.

हालांकि आईएनएस विक्रांत समुद्र में कब उतरेगा यह अब भी कोई दावे के साथ नहीं कह सकता. इस जहाज को बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 2003 में मंजूरी दी थी. लेकिन लेट-लतीफ़ी इतनी हो चुकी है कि इसका शुरूआती परीक्षण ही शुरू होने में 2020 तक का वक़्त लग जाने की संभावना जताई जा रही है. और पूर्ण रूप से इस जहाज के संचालित होने में 2023 तक का वक़्त लग सकता है. इस जहाज के निर्माण में 19,341 करोड़ की लागत आ रही है.