राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हैदराबाद स्थित विशेष अदालत ने मक्का मस्जिद धमाका मामले में सोमवार को असीमानंद सहित सभी पांचों आरोपितों को बरी कर दिया है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सबूतों का अभाव बताते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले में संदिग्धों का जुर्म साबित करने में नाकाम रहा है.

हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में 18 मई, 2007 को शुक्रवार के दिन धमाका हुआ था, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी और 58 घायल हो गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती जांच के बाद स्थानीय पुलिस ने यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था. सीबीआई ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. लेकिन अप्रैल 2011 में इसकी जांच एनआईए के हाथ में आ गई थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान 226 गवाहों और 411 दस्तावेजों की पड़ताल की गई. इनमें से 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपित लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित सहित 64 गवाह अपने बयान से पलट गए.

मक्का मस्जिद धमाका मामले में 10 आरोपितों में से केवल असीमानंद सहित पांच आरोपितों की ही गिरफ्तारी हो पाई थी. इनमें से असीमानंद समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव बम धमाके में भी आरोपित हैं. असीमानंद ने पहले इस धमाके में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही थी लेकिन बाद में वे अपने बयान से मुकर गए थे.

मक्का मस्जिद बम धमाका मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी सुनील जोशी की हत्या हो गई थी. वहीं, पूर्व आरएसएस कार्यकर्ता संदीप वी डांगे और आरएसएस कार्यकर्ता रामचंद्र कालसांगरा अभी तक फरार हैं. इसके अलावा जांच एजेंसी दो आरोपितों तेजराम परमार और अमित चौहान की अभी तक जांच कर रही है.