सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ‘अफ़्रीकी गायक’ का वीडियो ज़बरदस्त वायरल है. इसमें यह गायक मोहम्मद रफ़ी का एक ख़ूबसूरत गाना इतना सुर में गा रहा है कि संगीत के जानकार भी उसकी लय में ख़ामी निकालने से बचेंगे. दावा है कि यह गायक अफ़्रीकी देश केन्या का है.

फ़ेसबुक पर यह वीडियो लगातार शेयर किया जा रहा है और हाल में इसे यूट्यूब पर भी अपलोड किया गया है. वहां भी दावा यही है कि यह गायक केन्या का नागरिक है. क्या हिंदू, क्या मुस्लिम, क्या दक्षिणपंथी और वामपंथी, सभी इस गायक के ‘अफ़्रीकी’ होने पर हैरान होते हुए वीडियो शेयर कर रहे हैं. आप नीचे वीडियो देख सकते हैं.

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लेकिन क्या सच में ऐसा है? यह बताने से पहले इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी है कि इस गायक को अफ़्रीकी बताना एक बार फिर यह बताता है कि भारतीय समाज रंग और नस्लभेद से ग्रस्त है, भले ही वह इससे इनकार करे. हम किसी ज़्यादा काले रंग के व्यक्ति को अफ़्रीकी बता सकते हैं, या पूर्वोत्तर के किसी आदमी को चाइनीज़ (या चिंकी) कह सकते हैं. बचपन से स्कूल में पढ़ाई-समझाई गई यह सामान्य बात तमाम उच्च और नैतिक शिक्षा के बाद भी हम भूल जाते हैं कि ऐतिहासिक और भौगोलिक कारणों के चलते भारत में रहने वाले लोगों का रंग अलग-अलग है. गोरा, गेहुंआ, सांवला और काला, इन सभी रंगों के लोग यहां रहते हैं.

इसके अलावा आवाज़ का अंतर भी है. अफ़्रीकी नागरिकों और भारतीयों के उच्चारण में बड़ा फ़र्क़ है. इस वीडियो में गा रहे गायक का उच्चारण बिलकुल किसी भारतीय जैसा है. फिर भी लोग इस दावे पर यक़ीन कर रहे हैं कि वह अफ़्रीकी है. यह बताना इसलिए भी ज़रूरी था कि कुछ अफ़्रीकी गायकों ने भारत के लोकगीतों (भोजपुरी) को अपने ढंग से गाया है और उन गानों में उनका उच्चारण (एक्सेंट) भारतीयों जैसा बिलकुल नहीं है.

आश्चर्य की बात यह भी है कि सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाली जानकारियों पर पारखी नज़र रखने वाले लोग और बुद्धिजीवी भी इस झूठे दावे पर यक़ीन कर बैठे हैं. शेयर करने से पहले उन्होंने यह नहीं सोचा कि इस रंग के लोग भारत में अच्छी ख़ासी संख्या में मिलते हैं.

सच यह है कि यह वीडियो किसी केन्याई गायक का नहीं बल्कि एक भारतीय गायक संजय सावंत का है जो पिछले 20 साल से गायन कर रहे हैं. हिंदी, मराठी और गुजराती समेत अन्य भारतीय भाषाओं में वे गाते रहे हैं. 2004 में उनका रीमिक्स म्यूज़िक एल्बम ‘ओढ़नी उड़ उड़ जाए’ भी लॉन्च हो चुका है.

संजय सावंत अब तक सैकड़ों कार्यक्रमों में गा चुके हैं और दुनियाभर के देशों में अपनी आवाज़ पहुंचा चुके हैं. पता नहीं किसी और देश में उन्हें अफ़्रीकी समझा या कहा गया होगा या नहीं, लेकिन अपने ही देश में उन्हें भारतीय नहीं समझा जा रहा. सिर्फ़ इसलिए कि उनका रंग काला है.