ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा है कि अमेरिका और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया में हवाई हमला करना कानूनी और नैतिक रूप से सही था. थेरेसा मे ने कहा कि सीरिया की सरकार द्वारा वहां के लोगों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए हवाई हमले किए गए. सोमवार को उन्होंने सांसदों से कहा कि डूमा में हुए रासायनिक हमले में असद सरकार का हाथ होने के साफ सबूत थे. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि रासायनिक हमले को लेकर प्रतिक्रिया देने के लिए हवाई हमला करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था.

हालांकि लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बीन ने सरकार की इस कार्रवाई को कानूनी रूप से संदिग्ध बताया. उन्होंने कहा, ‘ब्रिटेन की सरकार संसद के प्रति जिम्मेदार है न कि अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) की सनक के लिए.’ कॉर्बीन ने सवाल किया कि हमले के लिए कौन जिम्मेदार है. उनके मुताबिक इसकी संभावना ज्यादा है कि रासायनिक हमला बशर-अल असद की सरकार ने कराया, लेकिन दूसरे समूह भी इसी तरह के हमले करते रहे हैं. हालांकि कॉर्बीन की पार्टी के ही कुछ सांसद हवाई हमले का समर्थन करते नजर आए. वहीं, हमले को लेकर किए गए सवालों का जवाब देते हुए थेरेसा मे ने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने पर ऐसा नहीं किया, बल्कि इसलिए किया क्योंकि यह सही था.

सीरिया के मुद्दे पर असद सरकार और रूस की पश्चिमी देशों से तनातनी जारी है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री के ताजा बयान से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने सीरिया में फिर से कोई सैन्य कार्रवाई की तो दुनिया में अफरातफरी मच जाएगी. हालांकि रूस ने अपने आधिकारिक बयान में पहले भी इस कार्रवाई की आलोचना की थी, लेकिन यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पुतिन ने खुद अमेरिका को सीरिया में आगे कोई कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है.

बता दें कि शनिवार को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने एक साझा सैन्य कार्रवाई में सीरियाई सरकार के कुछ ठिकानों पर बमबारी की थी. यह कार्रवाई हाल में सीरिया के एक शहर डूमा में हुए रासायनिक हमले के जवाब के रूप में की गई थी. इस हमले में कई बच्चों सहित करीब 70 लोग मारे गए थे. अमेरिका ने इस हमले का जिम्मेदार सीरियाई सरकार और उसके सहयोगी रूस को बताया था. हालांकि रूस लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है.