केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कर्ज़ के बोझ से दबी एयर इंडिया को बेचना चाहती है. इसके लिए उसने प्रक्रिया भी शुरू की है. लेकिन मामला ज़्यादा आगे बढ़ता नहीं दिखता. इस बीच कुछ अहम बयान आए हैं जिन्हें सुनकर लगता है जैसे मोदी सरकार इस मसले पर ‘अपनों के ही दबाव’ का सामना कर रही है.

उदाहरण के लिए पहला बयान आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रमुख माेहन भागवत का आया है. उन्होंने कहा है, ‘अगर एयर इंडिया का संचालन ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है तो उसे दूसरे हाथों में सौंप देना ही बेहतर है. जिससे कि उसका संचालन ठीक से हो सके. लेकिन वह हाथ (जिसे एयर इंडिया को सौंपा जाए) भारतीय होना चाहिए. आप जर्मनी और रूस को देखिए. वे कभी अपनी कंपनियों में विदेशी हिस्सेदारी के बहुमत की इजाज़त नहीं देते. वहां 39 या 49 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी विदेशी कंपनियां नहीं ख़रीद सकतीं.’

भागवत ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए यह भी जोड़ा कि उन्हें ‘सरकार पर पूरा भरोसा है. सरकार भी संभवत: यही चाहती है कि एयर इंडिया स्वदेशी हाथों में ही रहे.’ ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार एयर इंडिया की 76 फ़ीसदी हिस्सेदारी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है. लेकिन अब तक इस प्रक्रिया से जेट एयरवेज़ और इंडिगाे जैसी भारतीय एयर लाइंस हाथ खींच चुकी हैं. टाटा समूह के बारे में भी ख़बर है कि वह भी इस विनिवेश प्रक्रिया से हट सकती है. ऐसे में कुछ विदेशी एयरलाइंस के ही होड़ में बचे रहने की संभावना है.

उधर भाजपा के ही सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि एयर इंडिया का विनिवेश 2019 तक रोक दिया जाना चाहिए. बल्कि उन्होंने तो नागरिक उड्‌डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा को हटाने तक की मांग कर डाली. उन्होंने अपने ट्वीट में ये विचार साझा करते हुए मोदी सरकार के लिए भागवत के मशविरे का भी स्वागत किया.

दूसरी तरफ़ पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा है. अपने एक संपादकीय में उन्होंने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को भ्रमित बताया है. उन्होंने लिखा, ‘ऐसा लगता है जैसे हम रास्ता भटक गए हैं. और हमने मतदाताओं का भरोसा भी खो दिया है.’