गुजरात पुलिस में सिपाहियों की अस्थायी नौकरी हासिल करने वालों में एमबीए, बीसीए, बीटेक, बीई, एमटेक, बीएससी और बीएड जैसी डिग्रियां रखने वाले युवा भी शामिल हैं. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक साल 2017 में गुजरात के लोक रक्षक दल में भर्ती सिपाहियों में 458 के पास बीसीए, जबकि 341 के पास बीई और बीटेक की डिग्री है. वहीं, 29 सिपाही बीएसई और एमएसई, जबकि दो सिपाहियों के पास एमटेक की डिग्री है. इसके अलावा उच्च शिक्षा की दूसरी डिग्रियां लेने वाले 25 युवा भी सिपाही बने हैं. लोक रक्षक दल के सिपाहियों की नौकरी पांच साल तक अस्थायी रहती है, जिसके बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक वडोदरा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक जी एस मलिक ने बताया कि विभाग में कई युवा उच्च शैक्षिक योग्यता के बावजूद सिपाही के पद पर काम कर रहे हैं. उनका यह भी कहना था कि बीते साल लोक रक्षक दल के लिए चुने गए 17,532 जवानों में से कम से कम आधे उम्मीदवारों के पास ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्रियां हैं.

आखिर इसकी वजह क्या है?

गुजरात विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर गौरांग जानी पेशेवर डिग्रियों के बावजूद सिपाही बनने की मजबूरी के पीछे सुरक्षित नौकरियों की कमी को प्रमुख वजह बताते हैं. उनके मुताबिक, ‘निजी क्षेत्र में युवाओं को अच्छा वेतन देने वाली कंपनियों का जैसे सूखा पड़ गया है. ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं है कि ऊंची शैक्षिक योग्यता के बावजूद युवा कम वेतन और निचले क्रम की सुरक्षित नौकरियों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.’ वे यह भी कहते हैं कि समाज के कुछ हिस्सों में खाकी वर्दी का अपना रुतबा है, जो युवाओं को आ​कर्षित करता है.