‘2000 रुपये के नोट कहां गायब हो रहे हैं? कौन इनकी जमाखोरी कर रहा है?’

— शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह बयान नोटों की कमी के पीछे साजिश होने की आशंका जताते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के बाद बाजार नए नोटों की बाढ़ आ गई थी. 16.5 लाख करोड़ नोट छापकर बाजार में पहुंचाए गए थे.’ विपक्षी दलों का नाम लिए बगैर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समस्या पैदा करने की साजिश है, राज्य सरकार इससे सख्ती से निपटेगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के साथ संपर्क में है. मध्य प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में नगदी की किल्लत सामने आई है.

‘मोदी जी ने देश की बैंकिग व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है.’

— राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का यह बयान नगदी की किल्लत के लिए भाजपानीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के दौरान हमें कतार में खड़े रहने के लिए मजबूर किया गया था, क्योंकि उन्होंने (नरेंद्र मोदी) हमारी जेब से 500 और 1000 रुपये के नोटों को छीनकर नीरव मोदी की जेब में रख दिया था.’ भाजपा पर तंज करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अच्छे दिन कहां जा रहे हैं? इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नकदी की कमी को अस्थायी बताया है और इसका जल्द समाधान होने का भरोसा दिलाया है.


‘मोदी सरकार ने 48 महीने में जो विकास कार्य किए हैं, वे कांग्रेस और उसके सहयोगियों के 48 साल के शासन में भी नहीं हो पाए थे.’

— मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का यह बयान जरूरतमंदों और अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक विकास में मोदी सरकार की नीतियों को सफल बताते हुए आया. उन्होंने कहा कि समावेशी विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का गरीबों, किसानों, युवाओं, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को लाभ पहुंचा है. मुख्तार अब्बास नकवी ने आगे कहा कि अपने विकास कार्यों की वजह से 2019 के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीओ) पूर्ण बहुमत के साथ जीतेगा. केंद्रीय मंत्री ने मक्का मस्जिद मामले में अदालत के फैसले की आलोचना करने के लिए कांग्रेस पर भी निशाना साधा.


‘चाय का ठेला या पकौड़ा तलने की कड़ाही नहीं, केवल राम मंदिर मांग रहा था.’

— प्रवीण तोगड़िया, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

विश्व हिंदू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘हिंदुओं के कल्याण के लिए अपनी जिंदगी के 50 साल समर्पित करने के बाद मुझे किस बात के लिए निकाल फेंका गया...मैंने कोई पद नहीं मांगा था, मैंने प्रधानमंत्री बनाने की मांग नहीं की थी.’ प्रवीण तोगड़िया ने आगे कहा कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोई निजी अनबन नहीं है, बस राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने पर उनकी चुप्पी को लेकर विवाद है. प्रवीण तोगड़िया का यह भी कहना था कि अगर उन्हें पद चाहिए होता तो 2001 में ही मुख्यमंत्री बन गये होते और नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं बन पाते.


‘राजनीतिक विभाजन की वजह से यूरोपीय गृह युद्ध जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है.’

— इमानुएल माक्रों, फ्रांस के राष्ट्रपति

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों का यह बयान यूरोपीय देशों में बढ़ते राजनीतिक विभाजन को लेकर आया. यूरोपीय संसद में उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय स्वार्थ और नकारात्मकता हमें जोड़ने वाले तत्व पर बढ़त कायम करती दिखाई दे रही है. अनुदारता को लेकर आकर्षण अपने चरम पर पहुंच चुका है.’ इमानुएल माक्रों ने आगे कहा कि यूरोपीय संघ को अपने विचारों की रक्षा करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. उनके मुताबिक उदारवादी लोकतंत्र में सभी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाती है, जो यूरोपीय देशों का अपना चुनाव है. अनुदारवादी राजनीति की आलोचना करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे ऐसी पीढ़ी नहीं चाहते, जिसे अपने अतीत की जानकारी ही न हो.