अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों के बाद फेसबुक ने अब भारत में भी फर्जी खबरों पर लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है. कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर चलने वाली खबरों की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराने का फैसला किया है. इसके लिए फेसबुक ने डिजिटल पत्रकारिता से जुड़ी एजेंसी ‘बूम’ के साथ करार किया है. फेसबुक की ओर से बताया गया है कि वह अपने इस नए प्रोजेक्ट का ट्रायल कर्नाटक से शुरू करेगी जहां अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं.

फेसबुक ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में इस नए प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी साझा की है. इसमें कहा गया है, ‘थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम शुरू करने का मकसद फर्जी खबरों को फैलने से रोकना है. हमने इसके लिए तथ्यों की जांच करने वाली चर्चित एजेंसी ‘बूम’ के साथ करार किया है. बूम को उसके निष्पक्ष काम के लिए जाना जाता है और यह इंटरनेशनल फैक्ट चेकिंग नेटवर्क से सर्टिफाइड है.’

ब्लॉग में आगे बताया गया है कि भारत में ‘बूम’ अंग्रेजी की उन खबरों की समीक्षा करेगी जिन्हें फ्लैग किया गया है यानी जिन पर आपत्ति जताई गई है. समीक्षा के बाद खबरों को छह तरह की रेटिंग दी जाएगी. किसी खबर को उसे दी गई रेटिंग के हिसाब से ही न्यूज़ फीड में दिखाया जाएगा.

उदाहरण के तौर पर अगर किसी खबर को दी गयी रेटिंग उसके फर्जी होने या उस खबर के कुछ तथ्य फर्जी होने के बारे बताएगी तो उसे इसी हिसाब से फेसबुक के न्यूज फीड में नीचे कर दिया जाएगा. इसके बाद उस खबर को प्रकाशित करने वाले मीडिया संस्थान और इसे शेयर करने वाले यूजर्स को इसके फर्जी होने की जानकारी दी जायेगी. ब्लॉग में यह भी बताया गया है कि अगर इसके बाद भी उस मीडिया संस्थान के फेसबुक अकाउंट से लगातार ऐसी फर्जी खबरें पोस्ट की जाएंगी तो कंपनी इन पोस्ट की पहुंच 80 फीसदी तक कम कर देगी.

पिछले महीने डेटा लीक को लेकर हुए खुलासे के बाद से फेसबुक लगातार सवालों के घेरे में है. खुलासे से पता लगा था कि ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के यूजर्स का डेटा इकट्ठा कर कथिततौर पर अमेरिका के चुनावों को प्रभावित किया था. इस मामले में फेसबुक के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पिछले दिनों अमेरिकी संसद के सामने भी पेश होना पड़ा था.