टैक्सी, आॅटो औैर ई-रिक्शा के अलावा खाने-पीने की चीजें सप्लाई करने वाले दुपहिया वाहन चलाने के लिए सरकार ने व्यावसायिक (कमर्शियल) लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है. अब ऐसे वाहन निजी लाइसेंस पर भी चलाए जा सकेंगे. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक ट्रक, बस और दूसरे भारी वाहनों को चलाने के लिए अब भी व्यावसायिक लाइसेंस जरूरी होगा.

सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस बारे में सोमवार को राज्यों के लिए भी निर्देश जारी किया है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अब तक व्यावसायिक इस्तेमाल में लाए जाने वाले वाहनों के लिए व्यावसायिक लाइसेंस की जरूरत होती थी. निजी लाइसेंस बनवाने के बाद व्यावसायिक लाइसेंस के लिए एक साल का इंतजार भी करना पड़ता था. लेकिन अब नई व्यवस्था से व्यावसायिक लाइसेंस बनवाने में होने वाले भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी. अधिकारी के मुताबिक निजी लाइसेंस पर व्यावसायिक वाहन चलाने की छूट से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे.

हालांकि सरकार के इस फैसले से एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ जाएगी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं और बढ़ेंगी. दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट मामलों के जानकारों का इस पर कहना है कि सड़कों पर टैक्सियों के बढ़ने से निजी कारों में कमी होगी. उनके मुताबिक एक टैक्सी करीब छह कारों को जबकि एक आॅटो लगभग दर्जन भर कारें सड़क से कम करता है.