गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 के नरोदा पाटिया सामूहिक हत्याकांड मामले में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को आज बरी कर दिया. इससे पहले 2012 में विशेष एसआईटी कोर्ट ने उन्हें और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत 32 लोगों को दोषी ठहराया था. उसने माया कोडनानी को 28 साल कैद की सजा सुनाई थी. लेकिन अब हाई कोर्ट ने उन्हें निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया है. हालांकि बाबू बजरंगी की सजा बरकरार रखी गई है.

एसआईटी की विशेष अदालत के इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने अपील की थी. दिसंबर 2016 में इस पर सुनवाई शुरू हुई थी और पिछले साल अगस्त में अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. फिलहाल कोर्ट ने दो दोषियों - माया कोडनानी और किरपालसिंह छाबा - को बेल दे दी है.

हाई कोर्ट में दोषियों की सुनवाई का यह मामला विवादास्पद भी रहा. छह जजों ने इस मामले की अपीलों की सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. बाद में जस्टिस आरआर त्रिपाठी ने माया कोडनानी की अपील पर सुनवाई करने का फैसला किया. इसे अन्य अपीलों से अलग रखते हुए तेजी से सुनवाई की. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया था जिसके बाद सुनवाई पर कुछ समय के लिए रोक भी लगा दी गई थी. जस्टिस त्रिपाठी के रिटायर होने के बाद सुनवाई फिर शुरू हुई.

ऐसे भड़का था नरोदा पाटिया का दंगा

26 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगा दी गई थी. बोगी में अयोध्या से लौट रहे 57 कारसेवक सवार थे. आग लगने से उनकी मौत हो गई थी. उसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए थे. हिंसा की चपेट में अहमदाबाद भी रहा. यहां के नरोदा पाटिया इलाके में 28 फरवरी, 2002 को दंगाइयों ने 97 लोगों को मार दिया था.

माया कोडनानी पर क्या आरोप था

नरोदा पाटिया हिंसा मामले में गवाही देने वालों की मानें तो माया कोडनानी दंगे के वक्त वहां मौजूद थीं. उन्होंने दावा किया कि कोडनानी ने दंगाइयों को उकसाने का काम किया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने भड़काऊ भाषण देकर दंगाइयों को मुस्लिम बस्तियों में हमला करने के लिए कहा था.