गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 के नरोदा पाटिया सामूहिक हत्याकांड मामले में गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को आज बरी कर दिया है. सोशल मीडिया में इस फैसले पर भाजपा समर्थकों और विरोधियों के बीच खूब बहस हुई है. यहां कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं. वरिष्ठ पत्रकार हरिंदर बावेजा का ट्वीट है, ‘अविश्वसनीय. माया कोडनानी को चश्मदीद गवाहों द्वारा दिए इन बयानों के बाद भी बरी कर दिया गया कि वे भीड़ को उकसा रही थीं, तलवारें और कैरोसीन बांट रही थीं. हर भारतीय को इस (फैसले) पर शर्मिंदा होना चाहिए.’

हाई कोर्ट के इस फैसले का जिक्र करते हुए यहां विरोधियों और अन्य लोगों ने भाजपा को जमकर घेरा है. शैलेश खरे की तंजभरी टिप्पणी है, ‘माया कोडनानी और असीमानंद से बेहतर ‘अच्छे दिन’ की परिभाषा कोई नहीं बता सकता...’ इसके साथ ही यहां कुछ लोगों ने देश की न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. ट्विटर हैंडल‏ @Gurru_Ghantal पर प्रतिक्रिया है, ‘जिसे ट्रायल कोर्ट ने मास्टरमाइंड बताते हुए दोषी ठहराया था, उसे हाई कोर्ट ने बरी कर दिया. इस तरह हमारी कथित ‘काबिलेतारीफ’ न्याय व्यवस्था काम करती है...’

सोशल मीडिया में हाई कोर्ट के इस फैसले पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

द ग्रेट डिक्टेटर | @tittoantony

असल में माया कोडनानी को केंद्र सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत छोड़ा गया है...

मिड-डे | @mid_day

अटर्ली-बटर्ली |‏ @utterlybutterl2

मोदी के बाद प्रधानमंत्री बनने के योगी के सपने को माया कोडनानी ने तोड़ दिया... अब उन्हें घर से ही बहुत तगड़ा कॉम्पिटीशन मिलने वाला है.

ऋचा सिंह | @richa_singh

माया कोडनानी को नरोदा पाटिया मामले में बरी कर दिया गया है. जो लोग धर्म आधारित अपराधों में आरोपित थे, उन पर आ रहे फैसले भाजपा के कार्यकाल में गंगा जल साबित हो रहे हैं. सबके पाप धुल गए.

सुहासिनी हैदर | @suhasinih

किसी ने किसी को नहीं मारा, फिर भी लोग मारे गए. उम्मीद की जाए कि शायद किसी को इसकी वजह पता हो.