भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस साल सेना को समर्पित दो सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा. इनमें से पहला सेटेलाइट सितंबर में जबकि दूसरा इसी साल के आखिर तक भेजा जाएगा. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक सेना की ताकत में इजाफा करने के साथ देश की थल औैर समुद्री सीमा की सुरक्षा में इन दोनों सेटेलाइटों की अहम भूमिका होगी.

अखबार ने आगे लिखा है कि सितंबर में भेजा जाने वाला जीसैट- 7ए सेटेलाइट भारतीय वायुसेना के लिए होगा. इसे जीएसएलवी एमके-2 रॉकेट के जरिये अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. यह भारतीय नौसेना के ​लिए भेजे गए सेटेलाइट रुक्मिणी या फिर जीसैट-7 से मिलता-जुलता होगा. रुक्मिणी के जरिये हिंद महासागर में विशेष तौर पर चीन के जंगी जहाजों पर नजर रखने में नौसेना को काफी मदद मिलती है इसलिए इसे ‘आकाश में नौसेना की आंख’ भी कहा जाता है. जीसैट-7ए से वायुसेना को रडार स्टेशन, सैन्य ठिकानों और अवाक्स हवाई जहाजों के तालमेल को बेहतर करने में मदद मिलेगी.

इस साल के आखिर तक सेना के लिए भेजा जाने वाला दूसरा सेटेलाइट राइसैट- 2ए होगा. इसरो इसे पीएसएलवी रॉकेट के जरिये भेजेगा. यह अत्याधुनिक रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट होगा जिससे देश की सीमाओं की निगरानी में मदद मिलेगी. जमीन पर बारीक नजर रखने के साथ इससे मौसम की जानकारी भी पाई जा सकेगी. इन दो सेटेलाइटों के अलावा इसरो इन दिनों 800 करोड़ रुपये की लागत वाले महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान- 2 पर भी काम कर रहा है. चंद्रयान- 2 को इसी साल अक्टबूर में लांच किया जाना है.