पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर जल्दी ही टाटा समूह के साथ नई पारी शुरू करने वाले हैं. वैसे सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें ऐसा करने से पहले अगले साल जनवरी तक (एक साल के कूलिंग ऑफ पीरियड के दौरान) इंतज़ार करना था. लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से उन्होंने इस नियम से रियायत मांगी जो उन्हें मिल भी गई. इसके बाद माना जा रहा है कि वे किसी भी वक्त टाटा समूह ज्वाइन कर सकते हैं. वहां उन्हें कंपनी मामलों का वैश्विक प्रमुख बनाया गया है.

टाटा समूह की ओर से जयशंकर की नियुक्ति की घोषणा सोमवार को की गई. कंपनी ने इस बाबत बयान जारी किया. इसमें बताया गया, ‘जयशंकर सीधे कंपनी प्रमुख एन चंद्रशेखरन को रिपोर्ट करेंगे. अपनी नई भूमिका के तहत वे टाटा समूह के वैश्विक कंपनी मामलों और अंतर्राष्ट्रीय रणनीति के लिए ज़िम्मेदार होंगे. टाटा संस के सभी अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय अब आगे से जयशंकर को ही रिपोर्ट करेंगे.’ इस नियुक्ति पर कंपनी प्रमुख चंद्रशेखरन ने कहा, ‘उनका (जयशंकर का) समृद्ध अनुभव और अंतर्राष्ट्रीय मामलों का ज्ञान टाटा समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा. ख़ास तौर पर इसके मद्देनज़र कि हम अपने ब्रांड को वैश्विक पटल पर और मज़बूती देना चाहते हैं.’

बता दें कि जयशंकर भारतीय विदेश सेवा के 1977 बैच के अधिकारी रहे हैं. भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है. विदेश सेवा में अपने कार्यकाल के दौरान जयशंकर सिंगापुर, चीन और अमेरिका जैसे देशों में भारत के राजदूत भी रहे. भारत के विदेश सचिव के पद से वे जनवरी 2018 में सेवानिवृत्त हुए. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में डॉक्ट्रेट की डिग्री ली है.