कर्नाटक भाजपा में एक बार फिर हलचल है. पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येद्दियुरप्पा ने कहा है कि वरुणा विधानसभा सीट से उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र प्रत्याशी नहीं होंगे. उनके मुताबिक इस सीट से भाजपा के किसी अन्य कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाया जाएगा. सोमवार को येदियुरप्पा ने यह घोषणा मैसूर में एक रैली के दौरान की. इस दौरान भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर भी वहां मौजूद थे.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की इस घोषणा पर विजयेंद्र के समर्थकों ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसका विरोध किया. गुस्साए समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. खबरों के मुताबिक इस दौरान कई कार्यकर्ताओं ने भाजपा से इस्तीफा देने की बात भी कही. साथ ही विजयेंद्र के कुछ समर्थकों ने अगले महीने होने वाले चुनाव में एचडी देवगौड़ा की पार्टी, जनता दल (सेक्युलर) के पक्ष में वोट डालने की धमकी भी दी है.

इसका मतलब यह है कि वरुणा सीट पर अब मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों के बीच मुकाबला देखने को नहीं मिलेगा. इस सीट से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र भी मैदान में हैं. माना जा रहा था कि इस सीट से भाजपा विजयेंद्र को प्रत्याशी घोषित करेगी. वे पिछले करीब तीन हफ्तों से यहां डेरा भी जमाए हुए थे और उनके नाम का ऐलान महज औपचारिकता माना जा रहा था.

लेकिन ऐन मौके पर हालात बदल गए. असहज स्थिति में होने के बावजूद बीएस येद्दियुरप्पा ने मैसूर की रैली में हालात संभालने की कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘मैं खुद नहीं चाहता कि विजयेंद्र इस विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर उतरें. मैं चाहता हूं कि इस विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के लिए प्रचार करें.’

लेकिन ऐसा क्यों हुआ? बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कर्नाटक भाजपा के एक नेता के हवाले से कहा है कि येद्दियुरप्पा को दिल्ली से एक फोन आया था. इस नेता के मुताबिक उनसे पूछा गया कि जब बिजेंद्र के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है तो वे पर्चा भरने की तैयारी में क्यों हैं. सात उम्मीदवारों की जो चौथी सूची भाजपा ने जारी की थी उसमें वरुणा सहित चार जगहों से उम्मीदवारों के नाम रोक लिए गए थे. ऐसे में एक वर्ग का मानना है कि यह येद्दियुरप्पा के पर कतरने की कवायद है. उनके बारे में कहा जाता है कि उनके आगे किसी की नहीं चलती. लेकिन चर्चा है कि संघ और भाजपा ने भी तय कर लिया है कि येद्दियुरप्पा अकेले ही सब तय नहीं कर सकते.

हालांकि एक वर्ग ऐसा भी है जो इससे इनकार करता है कि विजयेंद्र को वरुणा से टिकट न मिलने में येद्दियुरप्पा का सियासी कद घटाने जैसी कोई बात नहीं है. इसके मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने विजयेंद्र को वरुणा से टिकट न देने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनके जीतने के आसार कम लग रहे थे.

75 साल के येद्दियुरप्पा की दक्षिण भारत में कमल खिलाने में सबसे अहम भूमिका थी. 2008 में जब कर्नाटक में भाजपा ने सरकार बनाई तो उस जीत का पूरा श्रेय पार्टी ने उन्हें दिया. क्योंकि उस दौर की भाजपा के पास न तो अटल बिहारी वाजपेयी थी और न ही नरेंद्र मोदी का राष्ट्रीय स्तर पर उभार हुआ था. बाद में उन्होंने खफा होकर अलग पार्टी बनाई तो कर्नाटक में भाजपा के वापस बुरे दिन आ गए. इसलिए उन्हें फिर मनाकर वापस लाया गया और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया. इसके बाद लग रहा था कि येद्दियुरप्पा अब कर्नाटक में फिर सर्वशक्तिमान होने वाले हैं. लेकिन नये घटनाक्रम ने कइयों को इस पर सवाल उठाने का कारण दे दिया है.