केंद्र सरकार ने मौत की सजा के लिए फांसी देने के विकल्प का बचाव किया है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि किसी कैदी को मौत की सजा के लिए जहरीला इंजेक्शन देने या फिर उसे गोली मारने के मुकाबले फांसी देना कम ‘अमानवीय और बर्बर’ तरीका है. सरकार ने एक जनहित याचिका पर यह जवाब दाखिल किया है.

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौत की सजा के लिए फांसी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ऋषि मल्होत्रा ने दाखिल की थी. इसमें उनका कहना था कि मौत की सजा पाने वाले अपराधियों को भी गरिमा के साथ मरने का अधिकार है और इसलिए सरकार फांसी से इतर मौत की सजा के लिए बेहतर विकल्प सुझाए.

इस याचिका के जवाब में पेश हलफनामे में केंद्र ने दलील दी है कि अमेरिका में जहरीले इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी जाती है, लेकिन यह तरीका सिर्फ देखने में ही शांतिपूर्ण और दर्दरहित लगता है. सरकार ने साथ ही यह आशंका भी जताई है कि इंजेक्शन में जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी जानकारी अगर सार्वजनिक हो गई तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता है. मौत की सजा के लिए गोली मारने के विकल्प पर केंद्र ने दलील दी है कि इस कार्रवाई के लिए स्वैच्छिक आधार पर पुलिसकर्मियों का चयन करना मुश्किल काम होगा.