कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले हरियाणा के एथलीटों के सम्मान में राज्य सरकार एक कार्यक्रम आयोजित कर रही है. यह कार्यक्रम 26 अप्रैल को पंचकुला में होना है. लेकिन राज्य के कई खिलाड़ी इस सम्मान कार्यक्रम का बहिष्कार कर रहे हैं.

द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक खिलाड़ियों के विरोध की वजह इनाम के रूप में दी जाने वाली नगद राशि में सरकार की तरफ से की गई कटौती है. प्रदेश की खेल नीति के मुताबिक कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के किसी खिला​ड़ी के स्वर्ण पदक जीतने पर उसे डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम दिया जाता है. इसी तरह रजत पदक पर 75 लाख रुपये जबकि कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 50 लाख रुपये दिए जाते हैं.

लेकिन हरियाणा सरकार ने हाल ही में इससे जुड़ा एक नया फैसला किया है. इसके मुताबिक प्रदेश का कोई खिलाड़ी अगर सेना, रेलवे या फिर किसी दूसरे संस्थान से जुड़ा है और उसे वहां से भी कोई नगद इनाम मिलता है तो ऐसी स्थिति में सरकार अपने नगद इनाम में कटौती कर लेगी. जैसे रेलवे से जुड़ा कोई एथलीट स्वर्ण पदक जीतता है और रेलवे से उसे 50 लाख का नगद इनाम मिल जाता है तो इस स्थिति में हरियाणा सरकार उस खिलाड़ी का नगद पुरस्कार डेढ़ के बजाय एक करोड़ कर देती है. पदक जीतने वाले खिलाड़ी इसी नीति का विरोध कर रहे हैं.

कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग स्पर्धा में कांस्य जीतने वाले बॉक्सर मनोज कुमार का कहना है कि किसी दूसरी सरकार ने यह फैसला नहीं किया है. अखबार से बातचीत में वे कहते हैं, ‘हरियाणा सरकार खिलाड़ियों को नौकरी भी नहीं देती और अब यह इनाम की रकम में भी कटौती कर रही है. यह इनाम की रकम पर टैक्स लगाने जैसा है.’

पहलवान साक्षी मलिक ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. राज्य सरकार के सम्मान समारोह में हिस्सा न लेने वाले एथ​लीटों में बॉक्सर अमित पंघल और गौरव सोलंकी के अलावा पहलवान किरण बिश्नोई भी शामिल हैं. नीरज चोपड़ा, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने भी इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने का फैसला किया है.