केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार करने के दोषियों को फांसी की सजा देने से संबंधित आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2018 को मंजूरी दी थी. अब यही सजा 12 साल से कम उम्र के लड़कों के यौन दुर्व्यवहार के मामलों में भी दिए जाने की तैयारी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट के पास भेजेगा.

बीती 22 अप्रैल को इस अध्यादेश के जरिये भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 में संशोधन किया गया था. साथ ही बच्चों को यौन हमलों से बचाने वाले कानून पॉक्सो एक्ट की धारा 42 में संशोधन किया गया था. पॉक्सो कानून लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता लेकिन आईपीसी की धारा 376 में इस अपराध का जिक्र करते हुए ‘महिला’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब है कि 12 साल से कम उम्र के लड़कों से यौन दुर्व्यवहार करने वाले को फांसी की सजा नहीं होगी.

इसे लेकर एक अधिकारी ने कहा, ‘इससे एक तरह की गड़बड़ी हो रही थी क्योंकि लड़की और लड़के के साथ हुए अपराध को अलग तरह से देखा जा रहा था. (केवल) 12 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार के मामले में लाया गया अध्यादेश पॉक्सो एक्ट की भावना के विरुद्ध है.’ यही वजह है कि सरकार ने एक्ट की धारा चार, पांच और छह में संशोधन करने से संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है. ये धाराएं 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होती हैं. इनके तहत दोषी को दस साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है. इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद 12 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे के साथ यौन दुर्व्यवहार करने वाले को मौत की सजा दी जा सकेगी.