उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन दक्षिण कोरिया पहुंच गए हैं. शुक्रवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने उनकी अगवानी की. उत्तर और दक्षिण कोरिया के छह दशकों के तल्ख़ रिश्तों के बाद यह पहला मौक़ा है जब उत्तरी कोरिया के किसी शासक ने दक्षिण कोरियाई जमीन पर कदम रखा है.

दोनों देशों के नेताओं की मुलाक़ात उत्तर और दक्षिण कोरिया को विभाजित करने वाली रेखा पर हुई. वहां मून जे-इन पहले से ही किम जोंग-उन का इन्तजार कर रहे थे. किम जोंग-उन को मून जे-इन ने अंतरराष्ट्रीय रेखा पार कर उन्हें अपने देश में आने का निमंत्रण दिया. किम जोंग-उन ने दक्षिण कोरिया में कदम रखा तो दोनों नेताओं ने एक बार फिर गर्मजोशी से हाथ मिलाया. इसके बाद किम जोंग-उन, मून जे-इन के साथ अंतरराष्ट्रीय रेखा पार करके कुछ क्षणों के लिए उत्तर कोरिया की सीमा में गए और फिर दक्षिण कोरिया लौट आये.

मून जे-इन ने कहा कि किम जोंग-उन से मिलकर वे बेहद खुश हैं. उधर किम जोंग-उन ने गेस्ट बुक में इस मुलाक़ात को एक नए इतिहास की शुरुआत लिखा. इस मुलाकात में दोनों नेता कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बहाल करने पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा निरस्त्रीकरण और उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को रोकने के उद्देश्य से भी इस मुलाक़ात को काफी अहम रहा है.

बताया जाता है कि इस मुलाक़ात के सुबह के सत्र के बाद दोनों देशों के नेता दोपहर का भोजन अलग-अलग करेंगे. इसके बाद दोनों देशों के बीच अनौपचारिक बातचीत होगी. वार्ता के अंत में दोनों पक्षों की तरफ से एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाएंगे. दोनों नेताओं के बीच रात्रि भोज पर भी मुलाक़ात होगी. इस भोज के बाद विदाई समारोह के साथ यह सम्मेलन खत्म होगा. कोरियाई प्रायदीप में शांति के अलावा किम जोंग-उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शिखर वार्ता के लिहाज से भी इस बैठक को अहम माना जा रहा है.