केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा और पूर्व पुलिस अधीक्षक एनके अमीन को इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में बरी करने का विरोध किया है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अहमदाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत को सौंपे हलफनामे में जांच एजेंसी ने कहा है कि उसके पास इस मामले में इन दोनों आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं.

पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा और एनके अमीन ने इस मामले में बरी करने की याचिका लगाई है. इसमें डीजी वंजारा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है. उनका यह भी कहना है कि उन पर लगे आरोप रिटायर डीजीपी पीपी पाण्डेय जैसे ही हैं, जिन्हें इस मामले में बरी किया जा चुका है, इसलिए उन्हें भी बरी कर देना चाहिए. वहीं, एनके अमीन का कहना है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक सबूत नहीं है, इसलिए उनको बरी कर देना चाहिए. इन याचिकाओं पर 14 अप्रैल को सुनवाई होनी थी. लेकिन सीबीआई द्वारा जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय मांगे जाने के बाद अदालत ने सुनवाई रोक दी थी.

15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में गुजरात पुलिस ने एक मुठभेड़ में मुंबई निवासी 19 वर्षीय इशरत जहां, जावेद शेख, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जौहर को मार गिराया था. पुलिस ने इन पर आतंकियों से जुड़े होने और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए थे. लेकिनि गुजरात हाई कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल ने इस मुठभेड़ को फर्जी पाया था. इसके बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.