ब्रिटेन सरकार द्वारा वीजा देने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किए जाने से सैकड़ों भारतीय डॉक्टरों के लिए संकट खड़ा हो गया है. खबर है कि नए आप्रवासन नियमों के तहत सरकार ने भारतीय डॉक्टरों को वीजा देने से इनकार कर दिया है. इन डॉक्टरों को ब्रिटेन की सरकार ने ही उसकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) योजना के लिए भर्ती किया था. लेकिन अब वीजा नहीं मिलने से वे काम शुरू नहीं कर पा रहे.

ब्रिटेन में छोटी स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे बुजुर्गों की दवा और देखभाल) के लिए भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका से डॉक्टरों की भर्तियां की गई थीं. ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडियन ऑरिजिन (बीएपीआईओ) ने इसके लिए यह सोचकर सहमति जताई थी कि योजना के तहत भारतीय डॉक्टरों को काम मिलेगा जिसे पूरा कर वे वापस चले जाएंगे. संस्था के लोगों को लगा कि इससे भारतीय डॉक्टरों को भी फायदा मिलेगा और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे ब्रिटेन को भी मदद मिलेगी. लेकिन अब वीजा को लेकर ब्रिटिश सरकार के सख्त रवैये ने भारतीय डॉक्टरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

द हिंदू के मुताबिक इस मुद्दे पर बात करते हुए बीएपीआईओ के डॉ रमेश मेहता बताते हैं, ‘हम जानते हैं कि कई डॉक्टरों को वीजा नहीं दिया गया है. उनमें से ज्यादातर भारतीय हैं. हम एनएचएस का समर्थन करते हैं लेकिन यह (वीजा न मिलना) बहुत निराशाजनक है. गृह मंत्रालय पूरी तरह नौकरशाह जैसा व्यवहार कर रहा है और इन डॉक्टरों को आने से रोक रहा है. हम जानते हैं कि सरकार के मंत्री मामले को देख रहे हैं लेकिन यह नहीं पता कि देर कहां हो रही है.’