अगर इस स्तंभ के तहत आपने पिछला आलेख पढ़ा है तो आप यह समझ ही गए होंगे कि शरीर की कुछ नियमित जांचें यानी प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कितना जरूरी है. इसके बाद ये स्वभाविक प्रश्न आते हैं कि हमें आमतौर पर कौन-कौन सी जांचें करवानी चाहिए और कितने अंतराल पर करवाते रहना चाहिए.

प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप में कौन-सी जांचें करवाएं, इसकी कोई लिस्ट नहीं है. यह आपकी उम्र पर निर्भर करता है. कम उम्र की जांचें अलग होती हैं, वहीं उम्र बढ़ने के साथ-साथ इनमें और कुछ जांचें जुड़ती चली जाती हैं. यदि आपकी ‘रिस्क प्रोफाइल’ खराब है यानी कि पारिवारिक-सामाजिक पृष्ठभूमि के चलते आपको कुछ बीमारियां होने का खतरा ज्यादा है तो इन जांचों का दायरा और पैटर्न भी बदल जाता है. ‘हाई रिस्क प्रोफाइल’ वाले लोगों का मामला तो और अलग होता है, हालांकि इनके बारे में हम फिर कभी चर्चा करेंगे.

उम्र के हिसाब से जांचें इसलिये अलग हो जाती हैं, क्योंकि हर उम्र के शख्स को अलग-अलग बीमारियों की आशंका होती है. उन्हीं आशंकाओं के हिसाब से जांचें भी तय करनी पड़ती हैं. आगे हम उम्र के हिसाब से इन जांचों का जिक्र करने जा रहे हैं.

18 वर्ष के आसपास के लोगों की प्रिवेंटिव जांचें :

जब आप जवानी में कदम रख चुके हों, देश की सरकार चुनने के लिए समझदार मान लिये गये हों तो आप इस कदर समझदार हो ही जाते हैं कि यदि कोई आपको अपना हेल्थ चेकअप करवाने के लिए कहे तो आप उसका मखौल तक उड़ाने को तत्पर हो जाएं. तब आप चिढ़ते हुए कह सकते हैं, ‘तुमने क्या हमें बुड्ढा मान लिया है!’

लेकिन यही उम्र है जब नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप की शुरुआत हो जानी चाहिए. इस उम्र में इन बातों का ख्याल रखा जाना चाहिए -

(1) अठारह साल की उम्र के बाद हमें एक नियमित अंतराल पर अपने डॉक्टर से सलाह तथा फिजिकल चेकअप कराते रहना चाहिए. फिजिकल चेकअप का मतलब? इसका मतलब है, बीपी (रक्तचाप), वजन, हाइट और अपना पूरा क्लीनिकल चेकअप.

(2) इस चेकअप के दौरान डॉक्टर आपसे अपने खान-पान, नशे की तलब, व्यायाम की आदत और सेक्स हेबिट्स पर भी पूछेगा. न पूछे तो आप खुद बता दें. इन सब बातों पर भी डॉक्टर की एक्सपर्ट सलाह अत्यंत आवश्यक है.

इस चेकअप में खुद पहल करते हुए सिगरेट, तंबाकू, दारू आदि की अपनी आदतों पर भी निसंकोच डॉक्टरी सलाह लें. यही उम्र है जब हम इन नशों के आदी होने की राह पर कदम रख रहे होते हैं. डॉक्टर को अपनी इस तरह की आदतों के विषय में खुलकर सबकुछ बतायें.

(3) यही उम्र मानसिक उलझनों की भी उम्र होती है. अपने डॉक्टर से अपने तनावों और डिप्रेशन आदि के बारे में भी सारी बातें शेयर करें क्योंकि इस कच्ची उम्र में मौत का एक महत्वपूर्ण कारण आत्महत्या भी है. इस जवान उम्र में मौत के कुछ अन्य कारण हैं- तेज तथा गैर जिम्मेदार ड्राइविंग से एक्सीडेंट में मौत, हिंसात्मक व्यवहार में फंसकर हत्या, कुछ कम उम्र वाले कैंसर.

(4) इसी चेकअप में डॉक्टर से व्यायाम तथा जिम आदि के बारे में भी डिस्कस करें.

(5) डॉक्टर से यह भी पूछें कि आपको किसी तरह के कोई टीके तो नहीं लगने हैं? इस उम्र में टिटेनस और डिफ्थीरिया का टीका फिर से लगाया जाता है. आगे हर दस साल में इसे वापस भी लगवाना होता है.

(6) चूंकि डॉक्टर को इस उम्र वाले व्यक्ति को एचआईवी तथा अन्य सेक्स संबंधी बीमारियों के बारे में आगाह भी करना होता है, इसलिए अगर वह आपसे सेक्स को लेकर सवाल करे तो बुरा न मानें.

25 से 45 वर्ष की आयु वालों की प्रिवेंटिव जांचें :

यह उम्र ऐसी होती है जो हमें भ्रम में रख सकती है कि शरीर में सब ठीक चल रहा है. जबकि वास्तविकता इससे अलग है. इसी उम्र में बीपी, हार्ट अटैक, खराब कोलेस्ट्रॉल और स्तन कैंसर आदि की बीमारियां धीरे-धीरे शरीर में घर कर रही होती हैं और आपको खबर ही नहीं होती. इसीलिए इस उम्र में ऐसे प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप की बड़ी आवश्यकता है.

इस उम्र में करवाई जाने वाली प्रिवेंटिव जांचें इस प्रकार हैं :

(1) अपना लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रोल), ब्लड ग्लूकोज, किडनी फंक्शन इत्यादि ब्लड टेस्ट जरूर कराएं.

(2) आपके दिल की रिस्क प्रोफाइल कैसी है? इसके बारे में डॉक्टर से पता करें. वह जो भी जांचें इस सिलसिले में बताए, करा लें. इन जांचों में आवश्यकतानुसार ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राफी और टीईई जांच करवाई जा सकती हैं.

(3) इस उम्र में ही स्त्रियों को स्तन कैंसर होने का खतरा होता है. डॉक्टर से इसकी जांच की पूरी जानकारी लें. वह आपको खुद आपके द्वारा अपने स्तनों की नियमित जांच कैसे करना, यह सिखाएगा. वह न बताये तो खुद उससे यह बात पूछ लीजिए. चालीस वर्ष की उम्र पर एक बार अपनी मैमोग्राफी की जांच जरूर करा लें.

(4) औरतों को इस उम्र में (सेक्स की शुरुआत के साथ ही) अपनी पैप स्मियर की जांच किसी अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से हर एक-दो साल पर कराते रहना चाहिए. यह एक छोटी सी बेहद सस्ती और डॉक्टर की ओपीडी में ही हो सकने वाली जांच है, जिससे बच्चेदानी का सर्वाइकल कैंसर एकदम शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है. इस अवस्था में पकड़ लें तो इस कैंसर को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है.

(5) हर उम्र में अपनी, तंबाकू-एल्कोहल की आदतों के बारे में डॉक्टर से जरूर डिस्कस कर लें. वह विस्तार से इन आदतों की जानकारी लेकर आपको इस संबंध में उचित सलाह देगा. ये बातें बताने में कोई संकोच बिलकुल न करें. डॉक्टर से शर्माना या सकुचाना कभी-कभी आगे जाकर खतरनाक भी सिद्ध हो सकता है.

(6) यदि हिपेटाइटिस की वैक्सीन पहले कभी न लगवाई हो तो उसका कोर्स भी पूरा कर लें. डिफ्थीरिया और टिटेनस के टीके का हर दस साल बाद का बूस्टर टीका भी समयानुसार लगवा लें.

45 से 64 वर्ष की आयु की प्रिवेंटिव जांचें :

यह वो आयु होती है जब हम अचानक ही मानो नींद से जागते हैं. अब हमें अपने स्वास्थ्य को लेकर शायद पहली बार एक डर महसूस होता है. साथ के किसी हमउम्र की बीमारी का पता चलता है या किसी नजदीकी की अचानक मृत्यु हो जाती है और आप घबराकर लंबी नींद से उठ जाते हैं.

मेरे पास ज्यादातर इसी उम्र के लोग अपने जीवन में पहली बार प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप के लिए आते हैं. इस उम्र के डर कुछ हद तक सही भी हो सकते हैं. इसीलिए कुछ चेकअप जरूर करा लें -

(1) अपने कार्डियो रिस्क की पूरी जांच-पड़ताल करवा लें. इन जांचों की चर्चा हम इसी स्तंभ में पहले भी कई बार कर चुके हैं. धूम्रपान, तंबाकू, आलसी जीवन, हाई कोलेस्ट्रॉल की पड़ताल के बाद ईकोकार्डियोग्राफी, ईसीजी इत्यादि की जरूरत अनुसार जो भी जांचें डॉक्टर उचित समझेगा, वे सब डॉक्टर द्वारा आपको बताई जायेंगी. सारी जांचें करायें.

यदि आपके परिवार में किसी नजदीकी रक्त संबंधी को पचास साल की उम्र से पहले ही हार्ट अटैक हुआ हो तो डॉक्टर को इसके बारे में जरूर बताएं. तब आपकी दिल की जांचों का दायरा बढ़ भी सकता है.

(2) पचास वर्ष से ऊपर होने पर अब हर साल ही इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है. आजकल, जिस तरह से फ्लू तथा वायरल इन्फेक्शन लगभग पूरे साल चलते हैं, और बिगड़ने पर इनका कोई इलाज नहीं है - बेहतर रहेगा कि पहले ही यह इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवा ली जाए.

साठ से ऊपर उम्र हो जाये तो एक टीका न्यूमोकोकस वैक्सीन का भी लगवा लें. यह वैक्सीन बस एक ही बार लगती है और बुढ़ापे में जानलेवा निमोनिया से बचाव करती है. जब चेकअप के लिए जाएं तो डॉक्टर से इन वैक्सीन को लगवाने का आग्रह जरूर करें.

(3) साठ से ऊपर हैं तो अपनी हड्डियों की मजबूती की जांच भी करा लें. औरतें तो जरूर करा लें क्योंकि रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) के बाद उनकी हड्डियों में कमजोरी (आस्टियोपोरोसिस) के चांस बहुत बढ़ जाते हैं. बोन डेंसिटी की यह जांच और इसके मुताबिक कुछ दवाओं को लेने से आप बुढ़ापे में छोटी-सी चोट से ही हड्डी टूटने की आशंका से बचेंगे.

(4) पचास वर्ष के बाद बड़ी आंत के कैंसर होने की आशंका भी बढ़ जाती है. सो अपने मल (विष्ठा) में ऑकल्ट ब्लड (रक्त) की सालाना जांच कराते रहें. इसी सिलसिले में यह सलाह भी दी जाती है कि हर पांच साल में अपनी सिग्मॉयडोस्कोपी और हर दस साल में अपनी कोलोनोस्कोपी जांच भी करा लें.

यदि परिवार के किसी रक्त संबंधी को पहले बड़ी आंत का कैंसर हो चुका हो तब तो और भी पहले की उम्र में ही ये जांचें शुरू करनी होंगी.

(5) पचास वर्ष की उम्र के बाद की स्त्रियों को हर दो साल में अपनी मैमोग्राफी की जांच द्वारा स्तन कैंसर की आशंका को दूर करने की सलाह भी दी गई है. स्तन की सेल्फ पेलपेशन द्वारा स्वयं जांच भी हर माह करते रहें.

(6) इनके अलावा अपनी नियमित बुनियादी रक्त जांचें भी हर दो साल में करवाते रहें (ब्लड शुगर, रीना फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल आदि)

और पैंसठ साल के बाद?

उपरोक्त वे सब जांचें तो फिर आगे जीवन पर्यंत हमें करवानी ही हैं जो पैंतालीस से चौसठ के बीच की उम्र में तजबीज की गई हैं .इनके अलावा ये सब भी करायें :

(1) यदि आप धूम्रपान के आदी पुरुष रहे हैं तो अब एक बार पेट की सोनोग्राफी जरूर करवा लें. इस सोनोग्राफी में विशेष रूप से यह दिखवा लें कि कहीं पेट की मुख्य रक्त नलिका (एब्डोमिनल एओटा) में कहीं खतरनाक फैलाव (एन्यूरिज्म) तो विकसित नहीं हो रहा.

(2) यदि कुछ जरूरी टीके पहले न लगवाये हों तो कम से कम अब तो लगवा लें.

(3) अपनी आंखों और श्रवण शक्ति की मेडिकल जांच भी जरूर करा लें. इस उम्र में बहुत सी दुर्घटनायें आंखों की कमजोरी और ऐन मौके पर चेतावनी की आवाज न सुन पाने के कारण भी होती हैं.