भाजपा सांसद उदित राज ने दलित द्वारा बौद्ध धर्म को अपनाने के कदम का समर्थन किया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सोमवार को उन्होंने कहा, ‘दलितों द्वारा धर्मांतरण करने की वजह उनके साथ होने वाला सामाजिक अन्याय है. यहां तक कि मूंछें रखने के लिए भी दलितों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है. मैं नहीं जानता कि उनके पास (धर्मांतरण के अलावा) दूसरा क्या विकल्प है. यह बहुत खतरनाक स्थिति है.’

गुजरात के ऊना जिले में रविवार को एक हजार से ज्यादा दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इनमें ऊना का वह परिवार भी शामिल था, जिसके साथ गोरक्षकों ने 2016 में एक मरी हुई गाय की खाल उतारने के लिए मार-पीट की थी. धर्मांतरण के बाद अखबार से बातचीत में इस परिवार के सदस्य बालू सरवैया ने कहा, ‘आज मैं मुक्त और सशक्त महसूस कर रहा हूं. हमने आज से अंधी आस्था को हमेशा के लिए छोड़ दिया है... हम जो करना चाहते हैं, अब उसे करने से कोई देवी-देवता नहीं रोकेगा.’ उन्होंने आगे कहा कि वे लोग अब खुद को शिक्षित बनाएंगे और उसके लिहाज से कोई दूसरा पेशा चुनेंगे. वहीं, बालू सरवैया के बेटे रमेश का कहना था कि हजारों वर्षों तक हिंदुत्व को मानने के बावजूद उन लोगों को कभी दूसरे हिंदुओं के बराबर नहीं समझा गया. उन्होंने आगे कहा, ‘हमें मंदिरों में घुसने नहीं दिया जाता और अछूत समझा जाता है...हम लोगों ने इससे ऊब कर बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला किया.’

हालांकि, दलित परिवारों के इस धर्मांतरण को तभी मान्यता मिलेगी, जब इसका गुजरात धर्म स्वतंत्रता कानून के तहत जिलाधिकारी के पास रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक दलित परिवारों के इस धर्मांतरण मौके पर भाजपा के दलित विधायक प्रदीप परमार भी मौजूद थे. इसे 2013 में जूनागढ़ के बाद सौराष्ट्र इलाके का दूसरा सबसे बड़ा धर्मांतरण बताया जा रहा है.

बीते महीने कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में भी दलित परिवारों ने भी बौद्ध धर्म अपना लिया था. इसमें लगभग 60 परिवार शामिल थे. इन परिवारों ने भी धर्मांतरण की वजह ऊंची जाति के हिंदुओं से मिलने वाले अपमान और प्रताड़ना को प्रमुख वजह बताया था.