बैंक खातों को आधार कार्ड और पैन नंबर से जोड़ने की मुहिम के चलते आयकर विभाग को 33,000 करोड़ रुपये के ऐसे लेन-देन का पता लगाने में मदद मिली है जिसे खाताधारकों द्वारा छिपाया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अब आयकर विभाग उन खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जिनके लेन-देन उनके द्वारा घोषित की गई आय से मेल नहीं खाते.

सूत्रों ने बताया कि पैन को आधार से जोड़ने के चलते उन लेन-देनों का भी पता चल गया है जो पहले जांच से बच गए थे. इन्कम टैक्स फाइल करते समय किसी व्यक्ति को कुछ जानकारियां देनी होती हैं. जिन लोगों के पास पैन नंबर नहीं है उन्हें फॉर्म 60 या 61 भर कर अपने लेन-देनों (जैसे वाहन की खरीद, अचल संपत्ति की बिक्री आदि) की जानकारी देनी होती है. लेकिन अब पैन नंबर को आधार से जोड़े जाने की वजह से ऐसे कई मामले पकड़ में आए हैं जिनमें लोगों ने यह बताते हुए गलत जानकारी दी थी कि उनके पास पैन नंबर नहीं है. साल 2016-17 व 2017-18 के विश्लेषण के मुताबिक 1.65 करोड़ लेन-देन ऐसे थे जो फॉर्म 61 के जरिये फाइल किए गए थे. इन्हें अंजाम देने वाले लोगों ने पैन नंबर होने के बावजूद उसका जिक्र फॉर्म में नहीं किया था.

एक तरफ कई लोग आधार को पैन से जोड़ने को लेकर सवाल कर रहे हैं, वहीं, अधिकारियों का कहना है कि इससे असूचित लेन-देन का पता लगाने में सुविधा हो गई है. आयकर विभाग काफी समय से लोगों को अपना पैन नंबर आधार से लिंक करने को कह रहा है. अब तक 37 करोड़ में से 17.4 करोड़ लोगों ने अपने पैन नंबर आधार से जोड़ लिए हैं. वहीं, ऐसे करदाताओं की संख्या 4.4 करोड़ हो गई है जिनके पैन नंबर आधार से जुड़े हैं और उन्होंने इन्कम टैक्स रिटर्न फाइल किया है. इस योजना का मकसद था एक से ज्यादा पैन नंबर रखने वालों को पकड़ना और टैक्स का भुगतान नहीं करने वालों और छिपे लेन-देनों का पता लगाना.