राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने राज्य के 32 में से 25 जिलों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यालयों के लिए ज़मीनें आवंटित की हैं. बताया जाता है कि इसके लिए ज़मीन की उपयोगिता की प्रकृति (लैंड यूज़) भी बदली गई है. इससे नया विवाद खड़ा हो गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सवाई माधोपुर और बीकानेर में तो ज़मीन की उपयोगिता की प्रकृति बदले जाने की प्रक्रिया अभी चल ही रही है. ख़बर की मानें तो राजे सरकार ने यह फ़ैसला भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उस घोषणा के मद्देनज़र लिया है जिसमें उन्होंने दिसंबर 2018 तक देश के सभी 640 जिलों में भाजपा के दफ़्तर खोलने की बात कही थी. उनके मुताबिक इस दफ़्तरों को उच्च तकनीकी बंदोबस्त के साथ राष्ट्रीय कार्यालय से जोड़ा जाएगा. इन सभी कार्यालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी. उनके मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले पूरे कर ली जाएगी.

हालांकि विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे को ‘बड़ा भूमि घोटाला’ बताया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा, ‘उन्होंने (भाजपा ने) कई जगहों पर लैंड यूज़ बदला है. नियमों का उल्लंघन कर बेशक़ीमती ज़मीनें हथियायी हैं. कांग्रेस अगर सत्ता में आई तो वह ऐसे सभी आवंटन रद्द कर देगी. ’ वही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद शर्मा का कहना है, ‘कहीं भी नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है. पार्टी उचित कीमत चुकाकर ज़मीनें ख़रीद रही है. इससे सरकारी ख़जाने को कोई नुक़सान नहीं हाे रहा है.’ राज्य के शहरी विकास एवं आवास मंत्री श्रीचंद कृपलानी भी कहते हैं, ‘सभी आवंटन नियमों के तहत, पूरे परीक्षण के बाद और उचित कीमत लेकर किए जा रहे हैं.’