उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के संभावित गठबंधन से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी चिंतित दिख रही है. इसीलिए वह एक ऐसी रणनीति पर काम कर रही जिससे 2019 में इन दोनों पार्टियों को पटखनी दी जा सके. राज्य के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा की इस रणनीति को ख़ुलासा करते हुए इसे ‘राजनीतिक ब्रह्मास्त्र’ बताया है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बलिया जिले के रसरा में मीडिया से बातचीत करते हुए राजभर ने कहा, ‘राज्य की 82 पिछड़ी जातियों को तीन वर्गों में बांटा जा रहा है. पिछड़ा, सर्वाधिक पिछड़ा और अतिपिछड़ा. इनमें से पिछड़ा वर्ग में चार जातियों को रखा जा रहा है. सर्वाधिक पिछड़ा में 59 और अतिपिछड़ा में 19 जातियों को शामिल किया जा रहा है. इस वर्गीकरण से इन जातियों को पिछड़े वर्गों के लिए तय 27 फ़ीसदी आरक्षण का अधिक से अधिक लाभ मिल सकेगा.’

जानकार भी मानते हैं कि यह वर्गीकरण अगर अमल में आया तो इससे सपा-बसपा को गंभीर चुनौती मिलेगी जो दलित, पिछड़ा और मुस्लिम जातीय समीकरणों के आधार पर बड़ी सफलता हासिल करने की जुगत भिड़ा रहे हैं. लेकिन इस वर्गीकरण से उनकी यह जुगत ढह सकती है क्योंकि इन पार्टियों का सबसे बड़ा जनाधार इन्हीं वर्गों में है. सपा तो ख़ास तौर पर पूर्व में पिछड़े वर्गों में शामिल यादवों के भरोसे ही बड़ी सफलता हासिल करती आई है.

ग़ौरतलब है कि बसपा और सपा ने हाल में ही फूलपुर और गोरखपुर लोक सभा सीटों पर हुआ उपचुनाव साथ मिलकर लड़ा था. इस सहयोग का नतीज़ा ये हुआ कि दोनों ही सीटें बसपा के समर्थन से सपा प्रत्याशियों ने जीत लीं. जबकि गोरखपुर पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपुर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट थी. इस सफलता से उत्साहित दोनों पार्टियों ने आगे होने वाले चुनावों में भी गठबंधन जारी रखने का ऐलान किया है.