हॉकी इंडिया ने भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों के कोचों की आपस में अदला-बदली कर दी है. बताया जाता है कि क़रीब हफ़्ते भर तक भारतीय हॉकी टीमों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई. इसके बाद यह फ़ैसला किया गया.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जोएर्ड मैरिन को पुरुष हॉकी टीम के कोच के पद से हटा दिया गया है. वे अब महिला हॉकी टीम को प्रशिक्षण देंगे. जोएर्ड की जगह हरेंदर सिंह को पुरुष हॉकी टीम का कोच बनाया गया है. वे महिला हॉकी टीम के कोच थे. हरेंदर सिंह की अगुवाई में ही भारत की जूनियर हॉकी टीम ने 2016 का विश्व कप ख़िताब जीता था. उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में महिला हॉकी टीम के कोच की भूमिका संभाली थी. उनसे पहले जोएर्ड महिला हॉकी टीम के कोच थे. ख़बर के मुताबिक दोनों कोचों को अब 2020 के टोक्यो आेलंपिक तक के लिए अनुबंधित किया गया है.

इस बदलाव की पुष्टि करते हुए हॉकी इंडिया के हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर डेविड जॉन ने कहा, ‘जोएर्ड को इसलिए हटाया गया क्योंकि इस राष्ट्रमंडल खेलों में हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई. जबकि इससे पहले हुए दो राष्ट्रमंडल खेलों में हम उपविजेता रहे थे. हालांकि इस ख़राब प्रदर्शन में कोच की बहुत ज़्यादा भूमिका नहीं थी. टीम ही कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही थी. फिर भी यह बेहतर समझा गया कि पुरुष हॉकी टीम के कोच के तौर पर अब हरेंदर को मौका दिया जाए.’ ग़ौरतलब है कि इस बार भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमें राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रहीं थीं.

यहां यह भी ग़ौर करने की बात है कि पिछले कुछ सालों से पुरुष हॉकी टीम के कोचों को बदले जाने का सिलसिला लगातार चल रहा है. इस क्रम में जोएर्ड 24वें कोच हैं जिन्हें हटाया गया. बीते पांच सालों में तो पांच कोच बदले जा चुके हैं. यह भी दिलचस्प है कि पुरुष हॉकी टीम के कोच को जहां चौथा स्थान हासिल करने की वज़ह से सजा दी गई है वहीं महिला हॉकी टीम के कोच को इसी वज़ह से पुरस्कृत किया गया है. इसकी वज़ह ये है कि महिला हॉकी टीम का राष्ट्रमंडल खेलों में चौथा स्थान हासिल करना बेहतर और सम्मानजक प्रदर्शन माना गया जबकि पुरुषों के लिए यह ख़राब समझा गया.