भारतीय इतिहासकारों और शिक्षाविदों की संस्था इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस (आईएचसी) ने मुगल शासक शाहजहां के बनवाए लाल किले को रखरखाव के लिए निजी कंपनी को सौंपने के फैसले पर चिंता जताई है. खबरों के मुताबिक बुधवार को आईएचसी ने कहा, ‘डालमिया भारत समूह को लाल किला सौंपे जाने की शर्तें परेशान करने की हद तक व्यापक हैं.’ डालमिया भारत समूह को लाल किले के भीतर निर्माण करने और व्याख्या केंद्र चलाने की इजाजत मिलने पर सवाल उठाते हुए संगठन ने कहा है कि इस संगठन के पास ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव का कोई अनुभव नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक इतिहासकारों के संगठन ने आशंका जताई है कि निजी कंपनी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लाल किले के भीतर की इमारतों को लेकर मनगढ़ंत बातें और व्याख्या फैला सकती है. आईएचसी के मुताबिक, ‘जब भी ऐसे दावे होते हैं, खास तौर पर सांप्रदायिक चरित्र वाले, तो उनसे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है.’ इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने लाल किले को गोद देने के समझौते की समीक्षा कराने की मांग की है. उसके मुताबिक सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ ऑर्कियोलॉजी या विशेषज्ञों की किसी अन्य सम्मानित संस्था से इस समझौते की समीक्षा करानी चाहिए और तब तक इस फैसले को निलंबित रखा जाना चाहिए.

हालांकि, इस पर सफाई देते हुए रविवार को केंद्र सरकार ने कहा था कि लाल किले को रखरखाव के लिए गोद देने का मतलब उसे डालमिया समूह को सौंपना नहीं है. पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक यह कदम ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना के तहत उठाया गया है, जिसका मकसद राजस्व पैदा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण पर्यटन को बढ़ावा देना है. हालांकि, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है और सरकार पर भारत में आजादी से जुड़े प्रतीक को गिरवीं रखने का आरोप लगाया है.