छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा से अक़्सर नक्सली हिंसा की ही ख़बरें सामने आती हैं या फिर पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में नक्सलियों के मारे जाने की. लेकिन इस बार इस जिले के 18 बच्चों ने यहां बदलाव की इबारत लिखी है. इन बच्चों ने जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) मेन्स में क़ामयाबी हासिल की है.

एनडीटीवी के मुताबिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) में प्रवेश के लिए 2018 में हुई जेईई-मेन्स में इस बार 2.3 लाख बच्चे सफल रहे हैं. इनमें 50,000 के क़रीब लड़कियां हैं. लेकिन इन सभी में दंतेवाड़ा के ये बच्चे सबसे अलग हैं क्योंकि इन्होंने विपरीत परिस्थितियों में यह सफलता हासिल की है. इस क़ामयाबी ने इन बच्चों में ज़बर्दस्त उत्साह का संचार किया है. एक बच्ची ने इस सिलसिले में कहा भी, ‘आईआईटी या एनआईटी में दाख़िला लेना हमारा सपना है. इसलिए इस सफलता से हम बेहद खुश हैं और दोगुने जोश के साथ अब जेईई-एडवांस्ड की तैयारी कर रहे हैं.’

इन बच्चों को सफ़लता के इस स्तर तक पहुंचाने में दंतेवाड़ा के कलेक्टर सौरभ कुमार का भी विशेष सहयोग रहा है. लिहाज़ा वे भी इनकी सफलता से काफ़ी खुश हैं. वे कहते हैं, ‘यह हमारे बेहद खुशी का पल है. अब हमारी कोशिश है कि ये बच्चे पूरी तैयारी के साथ जेईई-एडवांस्ड में बैठें और वहां भी क़ामयाब रहें.’ जेईई-एडवांस्ड अभी 20 मई को होने वाली है.