अभी एक-दो दिन पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जनता दल-सेकुलर (जद-एस) के प्रमुख एचडी देवेगौड़ा एक-दूसरे की तारीफ़ कर रहे थे. लेकिन चुनावी राजनीति ने जल्द ही इस सिलसिले को रोक दिया है. इन दोनों नेताओं के गुरुवार को सामने आए बयान इसकी मिसाल हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु के बाहरी इलाके केंगेरी में एक जनसभा काे संबोधित करते हुए कहा, ‘इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि राजनीति के पंडित क्या कह रहे हैं. जद-एस राज्य में तीसरे स्थान पर आ रही है. वह अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी. वह कांग्रेस को हटा भी नहीं सकती. ऐसी स्थिति में क्या कर्नाटक के समझदार मतदाताओं को अपना बेशकीमती वोट जद-एस को देकर उसे बर्बाद करना चाहिए?’ यही नहीं उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जद-एस ने ‘चुनाव जीतने के लिए आतंकियों से हाथ मिला लिया है. ऐसा करके उसने कर्नाटक के लोगों के साथ अच्छा नहीं किया है.’ यहां यह बताना भी ज़रूरी हो जाता है कि जिस इलाके में मोदी ये आरोप लगा रहे थे उसे वोक्कालिगा समुदाय की बहुलता वाले इलाकों का द्वार कहा जाता है. इस समुदाय पर जद-एस की पकड़ मजबूत मानी जाती है.

इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी नरेंद्र मोदी को सीधे निशाने पर लेते दिखे. उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘सार्वजनिक भाषण देने की कला में नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी से कहीं ज़्यादा तीखे हैं.’ हालांकि उन्होंने इस दौरान भी ये संकेत नहीं दिया कि सरकार बनाने के लिए अगर ज़रूरत पड़ी तो वे मोदी की भाजपा से सहयोग का आदान-प्रदान करेंगे या नहीं. याद रखने लायक यह भी है कि अभी एक दिन पहले ही देवेगौड़ा ने मोदी की तारीफ़ की थी. उन्होंने कहा था, ‘जब 2014 में भाजपा को लोक सभा में पूर्ण बहुमत मिला तो मैं सदन की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने वाला था. इसकी वज़ह ये थी कि मैंने उस चुनाव से पहले कहा था कि भाजपा सत्ता में आई तो मैं लोक सभा में नहीं रहूंगा. लेकिन जब मैं इस्तीफ़ा देने लगा तो प्रधानमंत्री मोदी ने रोक लिया.’