स्वीडिश अकादमी ने साल 2018 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार को रद्द कर दिया है. द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक नोबेल पुरस्कार देने वाली इस संस्था ने अपनी चयन समिति के सदस्यों के खिलाफ यौन शोषण और विजेताओं के नाम जाहिर करने के आरोपों को देखते हुए यह कदम उठाया है. अकादमी की एक सदस्य के पति और फ्रेंच फोटोग्राफर जीन क्लाउड-अरनॉल्ट पर बीते साल 18 महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था. लेकिन इन विवादों के चलते बीते कुछ महीनों में स्वीडिश अकादमी के 18 में से छह सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं.

शुक्रवार को स्वीडिश अकादमी ने बताया कि साल 2018 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार 2019 में दिया जाएगा. अकादमी के स्थायी सचिव एंडर्स ओल्सन ने कहा, ‘हमने पाया है कि अगले साहित्यकार के नाम की घोषणा से पहले जनता का विश्वास जीतने के लिए समय देने की जरूरत है.’

1943 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जा रहा है. इस बारे में नोबेल फाउंडेशन का कहना है कि सैद्धांतिक तौर पर नोबेल पुरस्कार हर साल दिया जाता है लेकिन नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में अलग-अलग वजहों से इस पर फैसले को टाला भी गया है. फाउंडेशन के मुताबिक इस साल का साहित्य का नोबेल पुरस्कार न देने के फैसले से नोबेल पुरस्कारों की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.