इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही हैं. इनमें वे दो व्यक्तियों की मूर्तियों को माला पहनाकर श्रद्धांजलि देते नज़र आ रहे हैं. पहली मूर्ति को देखकर न केवल भारतीय बल्कि दुनिया का कोई भी व्यक्ति बता देगा कि वह महात्मा गांधी की है. लेकिन दूसरी मूर्ति को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह नाथूराम गोडसे की है. वही नाथूराम गोडसे जिसने गांधीजी की हत्या की और जिसे भाजपा से जुड़े कुछ लोग समय-समय पर अपना नायक बताते रहे हैं.

इस तस्वीर के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की गई है कि एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गांधीजी के रास्ते पर चलने की बात करते हैं लेकिन दूसरी तरफ़ उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को श्रद्धांजलि देते हैं. तस्वीर में भले ही नाथूराम गोडसे नहीं लिखा है, लेकिन ‘गांधी का हत्यारा’ लिखने का मतलब कुछ और हो भी नहीं सकता. लेकिन क्या वायरल तस्वीर में दिख रही मूर्ति नाथूराम गोडसे की ही है?

गूगल करने पर पता चलता है कि इस तस्वीर में दिख रही मूर्ति को नरेंद्र मोदी एक नहीं बल्कि कई बार पुष्प अर्पित कर चुके हैं. बतौर प्रधानमंत्री वे नाथूराम गोडसे की मूर्ति को बार-बार श्रद्धांजलि दें और यह बात चर्चा का विषय न बने यह संभव नहीं लगता. यह बात इस तस्वीर को लेकर किए जा रहे दावे पर यक़ीन करने से रोकती है.

सच यह है कि दूसरी मूर्ति नाथूराम गोडसे की नहीं बल्कि दीनदयाल उपाध्याय की है जिन्हें भाजपा और उसकी विचारधारा को मानने वाले लोग प्रेरणा मानते हैं. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता व प्रचारक और भारतीय जनसंघ (जो अब भाजपा है) के अध्यक्ष रहे. उनकी जिस मूर्ति को प्रधानमंत्री मोदी माला पहना रहे हैं वह भाजपा के मुख्यालय में लगी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेता जब भी वहां जाते हैं तो मूर्ति को पुष्प अर्पित करते हैं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती और पुण्यतिथि के मौके पर भी प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. नीचे दी गईं तस्वीरों से साफ़ हो जाता है कि सोशल मीडिया का दावा भ्रामक है.