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बीते साल कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की तुलना हिटलर से करते हुए कहा था कि उनके हाथों पर भी निर्दोष लोगों का उतना ही खून लगा हुआ है जितना कि जर्मनी के तानाशाह के हाथों पर. बजफीड द्वारा बनाया गया यह वीडियो थरूर की इसी बात को दुहराता नजर आता है. यह बताता है कि ब्रिटिश शासन में जब दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान पश्चिम बंगाल और भारत के कई और हिस्सों में तूफान की त्रासदी के बाद भयंकर अकाल पड़ा तो अंग्रेजों का रवैया भारतीयों के प्रति किस कदर बर्बर था. यह वीडियो पत्रकार और लेखिका मधुश्री मुखर्जी के हवाले से जानकारी देता है कि उस वक्त लोगों के पास एक वक्त का खाना जुटना भी मुश्किल हो गया था, लेकिन तब चर्चिल के ही कहने पर उनका अनाज छीनकर ब्रिटिश सेना को भिजवा दिया गया था.

हॉलीवुड द्वारा लगातार विंस्टन चर्चिल का महिमामंडन करने वाली फिल्में बनाने की आलोचना करते हुए यह वीडियो बताता है कि किस तरह इंग्लैंड का यह नेता लगभग पचास लाख भारतीयों की अकाल मौत की कीमत पर युद्ध का हीरो बना था. पश्चिम का सिनेमा चर्चिल के उन फैसलों पर रोशनी डालने की जरा भी जहमत नहीं उठाता जिनके चलते ब्रिटेन का उपनिवेश रहे देशों में लाखों लोगों की जिंदगियां चली गईं.

यह वीडियो चर्चिल के उस बेहद मशहूर और लापरवाही भरे बयान का भी जिक्र करता है जिसमें उनका कहना था, ‘अकाल के चलते अगर इतने बुरे हालात हैं तो गांधी जिंदा कैसे हैं?’ चर्चिल का यह बयान और भारत से जुड़ा उनका अतीत उन्हें तमाम वॉर फिल्मों के जरिए नायक बनाने के बावजूद उनकी मनुष्यता पर प्रश्नचिन्ह लगा देता है और यही शिकायत यह वीडियो हॉलीवुड से करता नजर आ रहा है.